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अवैध खननकर्ताओं की माफियागिरी

By on July 8, 2018 0 84 Views

टोंक। चेजा पत्थरों के अवैध खनन का गढ़ बन चुके टोंक में खनन माफियाओं के हौंसले इतने बुलंद हो गए हैं कि अब पहाड़ी क्षेत्रों में प्रतिदिन कई विस्फोट होते हैं। जिसके बाद खुलेआम अवैध पत्थर भरकर दौड़ती ट्रेक्टर-ट्रॉलिया वन विभाग, पुलिस व प्रशासन का मुंह चिढ़ाते हुए शहर में गुजरती आराम से दिखाई देती हैं। लेकिन अवैध खननकर्ताओं की माफियागिरी के आगे मजाल हैं कि वन विभाग या पुलिस व प्रशासन कोई कार्यवाही कर ले,इसे अनदेखी कहे या लापरवाही कि आखिर क्यूं खुलेआम सडक़ों पर दौड़ती अवैध चेजा पत्थर से लदी ट्रेक्टर ट्रॉलियों पर कोई कार्रवाई नही होती हैं। जबकि कार्यवाही नही होने से बैखोफ होकर खनन माफिया प्रतिदिन पहाड़ों पर ना सिर्फ धमाके कर रहे हैं। वही अपने गुंडों के बल पर उन्हे शहर भर मे उनका संचालन भी कर रहे हैं।

दरअसल दुधिया बालाजी,कच्चा बंधा,गोल डूंगरी क्षेत्र, बहीर के गढ्ढा छिपालाई, गढ्ढा पहाडिय़ा,खोहल्या माता मन्दिर के पास स्थित वनक्षेत्र में धडल्ले से खनन जारी है। क्योंकि भले ही खनन करने वालों चंद लोग हैं लेकिन उनका साथ देने वाले गुंडों या फिर यूं कहे उनके इशारे पर काम करने वाले गुंर्गो की संख्या असंख्य हैं। इन गुर्गो का काम पहला काम तो ब्लास्टिंग के समय खनन क्षेत्र पर जाने वाले रोड पर नजर रखना होता हैं, बाद में पत्थर से भरी ट्रेक्टर ट्रॉलियों पर पैनी नजर रखते हुए। यही कारण हैं कुछ माफियागिरी तो कुछ प्रशासनिक मिलीभगत की वजह से बेखोफ होकर अपना काम करते हैं और दिनो-दिन खोखली होती जा रही हैं। बल्कि कई पहाडिय़ों का तो अस्तित्व ही मिट गया हैं। जबकि मामलें पिछले कुछ सालों में जनप्रतिनिधियों व राजनैतिक दलों के नुमांइदों की खामोशी शहर के दर्द पर नमक छिडकता दिखता हैं। हैरत की बात यह है पुलिस व प्रशासन की नजरों से बचाकर खनन माफिया इतना विस्फोटक लाते कहां से हैं। जिससे रोजाना ब्लास्टिंग कर पहाड़ों को खोखला किया जाता हैं। सवाल यही है कि इतना होने के बावजूद प्रशासन और पुलिस की आंखे क्यूं नही खुलती कि इतनी बडी संख्या मे विस्फोटक आ कहां से रहा हैं। दूसरी ओर वनकर्मी और उनके अधिकारी भी यह मानते तों है कि संयुक्त से काम करने वाले खनन माफियाओं से वनक्षेत्र मे अवैध खनन रूकवाना उनके बस की बात नही रही। वनविभाग के अधिकारी-कर्मचारी जहां विस्फोटक सामग्री पर पुलिस कार्यवाही की राह तकते हैं जबकि पुलिस अधिकारी भी मामलें शिकायत नही मिलने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं। भले ही खनन रूकवाने के अधिकारी लाख दावे करें लेकिन सच्चाई किसी से छूपी नही हैं, सुरज उदय से पहले शुरू होने वाली पहाड़ों पर ब्लास्टिंग का दौर दोपहर तक चलता हैं दूसरी ओर शहर के बेखोफ होकर निकलते उनके ट्रेक्टर ट्राली पर कार्यवाही करने परहेज रखने वाले वनविभाग, पुलिस व प्रशासन आखिर कैसे टोंक वन संपदा का बचा पाएंगे।

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