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मुस्लिम दरगाह का हिन्दू खिदमतगार

By on June 17, 2018 0 57 Views

साम्प्रदायिक सोहार्द की नगरी के नाम से मशहूर नवाबी नगरी टोंक जहां प्रसिद्ध है ऐतिहासिक धरोहर के रूप विख्यात ईरफान साहब की दरगाह जहां है हिन्दू खिदमदगार। जहां गंगा जमनी संस्कृति का संगम माना जाता है, जहां पर हिन्दू  दीपावली पर मुस्लिम लोग बधाईयां बांटते हैं, इसकी बानगी है टोंक की मौलवी इरफान साहब की दरगाह जहां का खिदमतगार जमाने से हिन्दू रहा है l साम्प्रदायिक सद्भाव की नगरी टोंक में मोलवी इरफान साहब की दरगाह नवाबी नगरी में साम्प्रदयिक सौहार्द की मिसाल है जहां का खिदमतगार एक जमाने से हिन्दू रहा है, इस दरगाह की खिदमत हिन्दू समाज के राधेष्याम माली के पूर्वज पीढियों से करते आये है, ओर आज भी यहां यह परम्परा जीवित है, दरगाह की सभी प्रकार की खिदमत ओर आयाजनों पर राधेश्याम माली के परिवार से कोई सदस्य मौजूद रहता है, ओर अयहां आने वाले सवालियों के सवाल इरफान साहब को पेश करता है। साम्प्रदायिक सद्भाव की नगरी टोंक में मोलवी इरफान साहब की दरगाह पर सालभर कई उर्स आयोजित होते हैं जिसमें दूर दूर से लोग यहां इबादत के लिए पहुंचते है, सभी धर्मों ओर मतावलम्बियों का यहां जमावडा लगा रहता है, उर्स के दोरान यहां खीर बनायी जाती है जिसको लूटने के लिए के लिए लोग भरसक प्रयास करते है, लोगों का मानना है कि यहां से कोई खाली हाथ नहीं जाता जो भी मन्नत यहां मांगता है उसकी मुराद यहां जरूर पूरी होती है। इरफान साहब की दरगाह पर अजमेर शरीफ की तरह दूर दूर से यात्री पहुंचते है, ओर उर्स मुबारक पर चादर पेश कर अपनी मन्नते मांगते है कई लोग पीढियों से इस दरगाह पर आ रहंे हैं ओर यहां आकर सूकून महसूस करते है।

इतिहास चाहे जो भी रहा हो लेकिन साम्प्रदायिकता के इस दौर में इरफान साहब की दरगाह लोगों के लिए एक मिसाल है जहां का खिदमतगार पीढियों से हिन्दू है ओर इस गंगा जमनी संस्कृति की परम्परा को निभा रहा है, ओर कोम को लेकर सियासत करने वालों के लिए नसीहत बना हुआ है

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