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महिलाओं को मंदिर में जाने से रोक रहे 50 प्रदर्शनकारी हिरासत में

By on October 17, 2018 0 37 Views

राज्य में कई जगह सबरीमाला बचाओ रैली निकाली गई।

केरल में स्थित 12वीं सदी के भगवान अयप्पा के इस मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध था।

सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में अपने फैसले में कहा था- इस मंदिर में हर उम्र की महिलाएं कर सकेंगी पूजा।

सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे 50 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इनमें त्रावणकोर देवस्थान बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रयार गोपालकृष्णन भी शामिल हैं। इससे पहले नजर बचाकर मंदिर के करीब पहुंचने मे कामयाब हुई दो महिलाओं को प्रदर्शनकारियों ने आगे जाने से रोक दिया। इनमें केरल की पत्रकार लिबी सीएस भी शामिल थीं। हिंसा की आशंका को देखते हुए यहां पांच किमी के दायरे में हजारों पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। किसी भी प्रकार की दुर्घटना न हो इसलिए पूरे क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है।
महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटने के बाद सबरीमाला मंदिर बुधवार को पहली बार मासिक पूजा के लिए खोला जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने 12वीं सदी के भगवान अयप्पा के मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटा दिया था। केरल सरकार ने कहा है कि हम कोर्ट के आदेश को लागू करेंगे। लेकिन, पूरे राज्य में अदालत के फैसले का विरोध किया जा रहा है। हंगामे और सामूहिक आत्महत्या की धमकी भी दी गई है। फैसले का विरोध करने वालों में महिलाएं भी शामिल हैं।

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने मंगलवार को कहा कि मंदिर में जो भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आएगा, उसकी रक्षा की जाएगी। हम किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं देंगे। मेरी सरकार सबरीमाला के नाम पर हिंसा नहीं होने देगी। अगर किसी ने श्रद्धालुओं को मंदिर जाने से रोका तो उसके खिलाफ सख्त कदम उठाया जाएगा। भगवान अयप्पा के सैकड़ों श्रद्धालु मंगलवार को मंदिर के रास्ते में 20 किलोमीटर पहले ही जमा हो गए। इनमें आजीवन ब्रह्मचारी रहने वाली महिला श्रद्धालु भी शामिल थे। ये लोग 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर की ओर जाने से रोक रहे थे। बसों, निजी गाड़ियों में प्रतिबंधित आयुवर्ग की महिलाओं की तलाशी ली गई। मंदिर में दर्शन का कवरेज कर रही महिला पत्रकार ने कहा कि उसे भी श्रद्धालुओं ने रोका, जबकि उसका मंदिर में जाने का कोई इरादा नहीं था।
सबरीमाला का बेस कैम्प कहे जाने वाले नीलक्कल में हालात ज्यादा तनावपूर्ण हैं। यहां हजारों महिलाओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। एक महिला श्रद्धालु ने कहा कि मासिक पूजा के लिए सबरीमाला के पट कल खोले जा रहे हैं। हम यहां 10 से 50 साल तक की महिलाओं को नहीं जाने देंगे। काली पोशाकों में कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र भी बसों को रोकते हुए दिखाई दिए।

सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के फैसले के खिलाफ केरल के राजपरिवार और मंदिर के मुख्य पुजारियों समेत कई हिंदू संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की थी। अदालत ने सुनवाई से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को सबरीमाला मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी। यहां 10 साल की बच्चियों से लेकर 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी थी। पुजारियों के अनुसार ये प्रथा लगभग 800 साल से चली आ रही थी। जिसकों सुप्रीम कोर्ट ने र६ कर दिया था।

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