January 17, 2019
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रोकना होगी भोजन की बर्बादी

By on December 14, 2018 0 76 Views

शादियों में भोजन की बर्बादी रोकने के लिए सरकार ने एक पाॅलिसी षुरू करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को उसने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह विवाह समारोहों में महमानों की संख्या कम करने और कैटरिंग सिस्टम को सही करने पर विचार कर रही है। बी. लोकुर की बेंच को बताया कि कोर्ट कि 5 दिसंबर के आदेष में उठाए गए इस म६े पर सरकार ने चर्चा कि है।

 

इस आदेष में सरकार ने षादी समारोहों में खाने और पानी की बर्बादी पर चिंता की थी। बेंच ने मुख्य सचिव को अगले 6 हफ्ते से पहले इस मामले में पाॅलिसी बनाने का आदेष दिया है। पहले कुछ सालों में तामझाम काफी बढ़ा है। शादियां अपनी हैसियत दिखाने का जरिया बन गई है। इस मोके पर खानपान में भी खुब तेजी आई है। लेकिन उसके एक बड़ा हिस्सा प्राय. खकाब जाता है। अक्सर लोग बाग अपनी आवष्यकता से जादा खाना बना लेते है और फीर बाद में कचरे में डाल देते है। भारत जैसे देष में लगभग 19 करोड़ लोग रोज भुखे पेट रहने को मजबूर रहते है भोजन की बडे़ पैमाने पर बर्बादी एक त्रासदी है। मगर शादी जैसे सामाजिक मसले में हस्तक्षेप करने का साहस आम तौर पर सरकारें नही करती हैं।

 

अब अगर सरकार यह कदम उठा रही है तो उसके साहस की प्रशंया की जानी चाहिए। सबसे पहले तो लोग इसका यही कहकर विरोध कर सकते हैं कि सामाजिक परंपराओं में सरकार कैसे दखल दे सकती है। लोगों ने तो इसी नाम पर सीमित मात्रा में पटाखे जलाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेष की धज्जियां उड़ा दी। मेहमानों की संख्या करने का विचार बहुत व्यावहारिक नहीं लगता। सवाल है कि आधार पर संख्या तय की जाएगी? लोग इसमें भी कई छिद्र निकाल लेंगे। हां यह नियम बनाया जा सकता है कि सडकों पर बारात किसी एक जगह पर निश्रिचत समय से ज्यादा नहीं रह सकती। उनके लिए कई नियम बनाए जा सकते हैं। जैसे इनकी सेवा के बदले यह षर्त रखी जाए कि मेजबान बचे हुए खाने किसी संस्था को दे देंगे। सरकार का यह प्रस्ताव महत्वपूर्ण है कि कैटरर और बेसहारा लोगों को खाना उपलब्ध कराने वाले एनजीओ की बीच एक व्यवस्था बनाई जाए।

 

 

 

 

 

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