March 18, 2019
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अपनी लड़ाई लड़ने में सक्षम

By on March 1, 2019 0 27 Views

भारत ने आतंकवाद के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते देए नियंत्रण रेखा के पार पाकिस्तान में धुसकर बालाकोट स्थित आतंकी शिविरों को पूरी तरह से तबाह कर दिया है। यह कार्रवाई हाल ही में पुलवामा में हुए आत्मघाती बम हमले के जवाब में की गई, जिसमें सीआरपीएफ के चालीस जवान मारे गए थे। पुलवामा हमले को लेकर पूरे देष में आक्रोश और गुस्से की भावना देखी गई तथा सार्वजनिक रूप से पाकिस्तान से प्रतिशोध लेने की मांग होने लगी। उस हमले पीछे जैश-ए-मोहम्मद और पाकिस्तानी सेना का हाथ था। उस हमले ने भारत के समक्ष एक चुनौती पेष कर दी थी कि भारत पाकिस्तान को कैसे इसका जवाब देता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सैन्य विकल्पों का चुनाव हमारे सशस्त्र बलों की पसंद पर छोड़ दिया था, जो अपना काम बेहतर जानती है। भारत द्वारा पाकिस्तान की आतंकी जड़ो पर इस हवाई हमले से पाकिस्तान और दुनिया को कई किस्म के संदेश देने की कोशिश की गई है। पहला तो यह कि अब भरत के सब की हद पार हो चुकी है और भार नियंत्रण रेखा से आगे जाकर पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर हमल करने के लिए तैयार है, जिनको पाकिस्तान इतने वर्शो पनाह देता आया है। इससे भारत के समर्थन में खड़े दुनिया के देषों को भी यह संदेश दिया गया है कि भार अपनी सुरक्षा के लिए उनके पास नहीं आता है, र्बिल्क भार को उनकी मदद इसलिए चाहिए कि वे आतंकवाद को पनाह देने वाले पाकिस्तान को अलग-थलग करें और पाकिस्तान की आर्थिक कमर तोड़ दें, ताकि वह आतंकवाद को पनाह देना बंद करे। पाकिस्तान सेना के जनरलों को यह एहसास हो जाए कि जिन आतंकवादियों को उन्होंने इतने वर्शो से पाला-पोसा है, अब वही आतंकवादी उनके लिए आर्थिक बोझ बन चुके हैं।

यह धारणा भी गलत है कि अगर भारत ने अन्य सभी राजनयिक, आर्थिक और भू राजनीतिक विकल्प समाप्त होने के बाद पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया, तो चीन पाकिस्तान के समर्थन में आ जाएगा। बेशक चीन पाकिस्तान में सीपीईसी और ग्वादर पोर्ट के अलावा पाक अधिकृत कष्मीर के उत्तरी क्षेत्र में सिंधु पर कुछ बड़े बांधो से माध्यम से बहुत बड़ा निवेश किया है, लेकिन चीन हमेशा अंतरराष्ट्रीय राय के खिलाफ नहीं जाने के प्रति सावधान रहा है, जब तक दक्षिण चीन सागर जैसे उसके अपने एजेंडे को चुनौती नहीं दी जाती।

हम जानते हैं कि चीन ने 1965, 1971 के भारत-पाक युद्ध और कारगिल संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के पक्ष मे हस्तक्षेप नहीं किया था। इस हवाई हमले के अलावा भारत पाकिस्तान पर दबाव बनाए रचाना जारी रखेगा। एक तो सिंधु नदी क ेजल को लेकर और दुसरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे कूटनीतिक प्रयासों से अलग-थलग रखकर उसकी आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश करेगा। भारत को सावधान रहने की भी जरूरत है, जैश और पाकिस्तान, दोनों भारतीय षहरों और नागरिकों पर हमलेकी कोशिश कर सकते हैं, क्योंकि मसूद अजहर का भाई भी इस हवाई हमले में मारा गया है। इस हमले का एलान विदेश सचिव ने किया, रक्षा सचिव ने इससे साफ है कि यह सैन्य कार्रवाई नहीं थी बल्कि आतंकवादी विरोधी कार्रवाई थी। पूरे देष के आला अधिकारियों से विचार-विमर्श के बाद इस आॅपरेशन को अंजाम दिया गया है। इस हवाई हमले का सबसे बड़ा संदेश यह है कि हम अपनी लड़ाई खुद ही लड़ने में सक्षम हैं और इसके जो भी परिणाम होंगे, उसे झेलने के लिए भी तैयार हैं।

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