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चुनावों के बाद नेताओं द्वारा किये गए वादों को भूलने पर ठगा सा महसूस करते है आमजन

By on November 22, 2018 0 78 Views

 

प्रदेशभर में जैसे-जैसे मतदान का दिन करीब आता जा रहा है उसी तरह प्रत्याशियों के प्रचार-प्रसार में भी इजाफा होता जा रहा है। कुछ दिन पहले तक जहां अनेकों उम्मीदवार अपनी-अपनी पार्टियों से टिकट की आस लगाए बैठे थे, वो सूचीऐं जारी होते ही पूरी तरह से साफ हो गया है। इस दौरान राजनेतिक पार्टियों ने कुछ पूराने उम्मीदवारों व कार्यकर्ताओं को टिकट दिया तो कुछ ने नए व युवा प्रत्याशियों पर भी भरोसा जताया। टिकट तो मिल गए लेकिन अब घाषित प्रत्याशी अपने-अपने क्षेत्रों में तरह-तरह के एजेंडें अपना रहे है। कुछ पुरानों को मनाने में लगे है तो कुछ जनता को मनाने में लगे है। लेकिन अब चुनाव बस अपने आखरी दौर में है ओर फिर से राजनेता उन क्षेत्रों मे जा रहे है जहां वो अपने कार्यकाल रहते तो पहले कभी गए नहीं या पांच साल पहले उन क्षेत्रो में सैकड़ों वादे करने गए थे। ओर इन हीं झूठे वादे करने में देखते-देखते पूरे पांच साल निकल गए लेकिन उन वादो में जरा भी असलियत नजर नहीं आई। लेकिन अब फिर से वहीं चुनावी माहौल है और घोषित प्रत्याशी लोगों के बीच जाकर तरह-तरह के वादे कर रहे है। कई प्रत्याशीयों का तो आम जन ऐसा विरोध कर रहे है कि उनकों अपने क्षेत्र में आने तक नहीं दे रहे। ओर कई लोग पिछली सरकार से नाराज होकर वोट ही न देने को कह रहे है। आमजन को बखूबी मालूम है कि पिछली बार किस-किस ने कितने झूठे वादे किये थे। क्योंकि हकीकत में कई क्षेत्र ऐसे है कि कितनी ही सरकारे आई ओर चली गई लेकिन उनके क्षेत्र में विकास के नाम पर कुछ नहीं हुआ है। बल्कि रोजगार के अभाव में उनकों ओर ज्यादा तकलीफ उठाना पढ़ रही है। ऐसे में राजनेताओं द्वारा चुनावों के समय किये गए सैकड़ों विकास के वादों को चुनावों के बाद भूलने पर जनता खुद को ठगा सा महसूस करती है ओर जनता का इस शासन प्रणाली पर से भरोसा उठ जाता है।

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