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गुर्बत में जीता कलाकार…

By on July 18, 2018 0 122 Views

कहा जाता हैं देष में प्रतिभा की कमी नही हैं लेकिन इसी के साथ एक कड़वा सच यह भी देष में कुछ ही लोगो या फिर यूं कहे खुषकिस्मत लोग ही अपनी कला के माध्यम से षौहरत की बुलंदिया को छूते हैं जबकि कई ऐसे में हैं जो गुमनामी के अंधेरे में खोकर गुर्बत के जिंदगी जीते नजर आते हैं टोंक में ऐसे कई प्रतिभाए या कलाकर बेहतर हुनर के बावजूद फाकाकषी का षिकार हैं, पुरानी टोंक चुडीगरान मोहल्ला के वहीदुद्दीन की भी कुछ ऐसी ही कहानी हैं अक्षरो को सुक्ष्म लिखने की हो या फिर थ्रीडी स्टाईल मे लिखने की या चने या चावल पर देष का नक्षा बनाने की या महापुरूषो के चित्र बनाने की, पुरानी टोंक के चुडीगरान मोहल्ला निवासी वहीदुद्दीन उर्फ कैप्टन खान की कला की एक बानगी इसी मे झलक जाती है कि साधारण रिफिल पैन से भी उसने 11 बाइ 16 के पेपर पर 38630 बार रब-रब लिखा छोडा है, बीए प्रथम वर्ष में कुछ समय पढने के बाद मां की देहांत की वजह से पढ़ाई छोड चुके है वहीद ने पिछले दस साल से अपनी कला के सबकों आकृषित किया है लेकिन यह कलाकार आज गरीबी के साये मे जीवन गुजार रहा है पर अपनी कला के प्रति वह आज भी उतना ही दिवाना हैं, 10 बाइ 10 कागज पर राम शब्द को 10456 बार लिखना, यही नही वह हिन्दी के शब्दो को बडी तेजी से उल्टा लिखने मे भी महारथ रखता है। बावजूद इसके वहीद ही नही उसका पूरा परिवार पिछले कई सालों से गुर्बत की जिंदगी जीने को मजबूर है।

कई बहालांकि उसी कला व लोगो की षिफारीष पर उसे सआदत अस्पताल में संविदा पर काम मिल गया है लेकिन मात्र 6 हजार मासिक मेहनताने पर घर चलाना कितना मुष्किल हैं वहीदुद्दीन ने हिन्दी, अग्रेजी, उर्दू के शब्दो को सुक्ष्म रूप मे लिखने की शुरूआत भले ही शौक-षौक में की हो लेकिन आज उन्हे बारीक शब्दों के कलाकार के रूप में जाना जाता है। अपनी कला की वजह से तीन बार व चार बार ईमानदारी की वजह से स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित हो चुके वहीद का आज तक उसकी कला को प्रोत्साहन देने वाले अधिकारी नही मिल पाए है कई बार अपनी कला के राष्ट्रीय लेवल तक पहुंचाने की भी कौषिष की लेकिन नाकामयाब रहा। आज वही वहीदुद्दीन उर्फ कैप्टन खान गुर्बत की जिंदगी जीने का मजबूर हैं मात्र 6 हजार मासिक कमाने पर वहीद पर पूरे परिवार को चलाने की जिम्मेदारी हैं। उसका कहना है इन छह हजार घर चलाना मुष्किल हैं फिर भी वह अपनी कला को जिंदा रखे हें….जिला प्रषासन से कई बार सम्मानित हो चुका वहीदुद्दीन अपनी इच्छा के बारे मे पुछने पर कहता है कि कई संस्थाओ मे जाने की सोची लेकिन हर समय आर्थिक परिस्थितीयां आडे आ जाती है, उसका सपना है उसका नाम गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्ड मे दर्ज हो और वह अपनी कला के माध्यम से जिले और राज्य का नाम रोषन कर सके।

 

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