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आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम ने मांगी पैरोल

By on October 30, 2018 0 60 Views

दुष्कर्म के आरोप में आजीवन सजा काट रहे आसाराम ने 20 दिन की पैरोल मांगी है।

 

नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहे आसाराम ने 20 दिन की पैरोल मांगी है। अंतिम सांस तक की सजा के इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश के लिए जेल प्रशासन ने मुख्यालय से मार्गदर्शन मांगा है। वहीं, आसाराम के भानजे ने जिला कलेक्टर कार्यालय में जिला पैरोल कमेटी के समक्ष आवेदन किया है। निचली अदालत ने इस मामले में आसाराम को दोषी करार देते हुए मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया था। आसाराम की ओर से उसके भानजे अहमदाबाद नंदीग्राम निवासी रमेश ने जिला पैरोल कमेटी में आवेदन किया है। इसमें बताया कि नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में 25 अप्रैल 2018 को आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। ट्रायल व सजा सुनाने के बाद अब तक वह पांच साल की सजा काट चुका है। पैरोल के नियमों के अनुसार वह प्रथम पैरोल ले सकता है, इसलिए उसे पैरोल दी जाए। इससे पहले आसाराम ने जेल प्रशासन के जरिए भी पैरोल कमेटी में आवेदन की प्रक्रिया शुरू की थी, लेकिन जेल मुख्यालय से इस संबंध में स्पष्ट निर्देश के अभाव में आसाराम का आवेदन फिलहाल जिला पैरोल कमेटी को प्रेषित नहीं किया जा सका है।

 

अब दाती पर एक ओर महिला ने लगाए दुष्कर्म के आरोप

 

शनिधाम के संस्थापक दाती मदन राजस्थानी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। शिष्या से दुष्कर्म मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने हाल ही केस दर्ज कर नए सिरे से जांच शुरू की है। इस बीच एक ओर महिला द्वारा दुष्कर्म व धोखदड़ी के आरोप लगाए जाने से दाती कि मुश्किल कम होने का नाम नहीं ले रही है। राजस्थान के पाली निवासी एक महिला ने उन पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, मानव तस्करी, आश्रम में रहने वाली बालिकाओं से दुष्कर्म करने और फर्जी ट्रस्ट बनाकर धोखाधड़ी करने जैसे आरोप लगाए हैं। महिला ने सोमवार को सोजत के एसीजेएम कोर्ट में इन आरोपों को लेकर दाती के खिलाफ परिवाद पेश किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। दिल्ली के फतेहपुर बेरी थाने में दाती और उसके भाइयों के खिलाफ एक शिष्या ने दुष्कर्म के आरोप में 9 जून को याचिका दायर की थी। आरोप था कि दाती ने पाली जिले के सोजत रोड के निकट आलावास आश्रम और दिल्ली के आश्रम में उसके साथ दुष्कर्म किया। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 11 जून को एफआईआर दर्ज की। रिपोर्ट दिल्ली क्राइम ब्रांच को सौंपी गई। क्राइम ब्रांच ने जांच पूरी कर स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की। पीड़िता ने हाईकोर्ट में निगरानी याचिका दायर कर इस केस की जांच सीबीआई से कराने की गुहार की थी। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने नए सिरे से जांच शुरू की, जिसे दाती की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने दाती की याचिका खारिज करते हुए सीबीआई जांच को सही ठहराया।

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