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विधानसभा चुनाव 2018 विश्लेषण (देवली-उनियारा)

By on December 10, 2018 0 282 Views

विधानसभा चुनाव 2018 के बाद स्थिती

टोक जिले में विधानसभा की चार सीटों पर चुनाव के बाद माना जा रहा हैं कि टोंक व निवाई सीट पर कांग्रेस की जीत लगभग निश्चित हैं। वही मालपुरा सीट पर कांग्रेस समर्थित रालोद के प्रत्याशी रणवीर पहलवान की जीत की संभावनाए अधिक हैं। वही देवली-उनियारा सीट पर कड़ा मुकाबला होने की संभावना हैं। टोंक जिलें में चारो सीटों पर कुल 9 लाख 81 हजार 121 मतदाता हैं जिसमें से 1326 सरकारी कर्मचारी मतदाताओं ने सरकारी प्रशिक्षण के दौरान अपने मत का प्रयोग किया। वही ईवीएम मशीन से 9 लाख 79 हजार 795 मतदाताओं में से 7 लाख 5 हजार 696 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया हैं और जिले की चार सीटों पर कुल 72.02 प्रतिशत मतदान हुआ। इसमें टोंक में 75.76 प्रतिशत, मालपुरा में 72.36 प्रतिशत, निवाई में 69.87 प्रतिशत और देवली-उनियारा में 70.57 प्रतिशत मतदान हुआ हैं। कुल मिलाकर जिले में चार सीटों में से तीन सीटों पर कांग्रेस जीत की ओर अग्रसर हैं। वही देवली-उनियारा सीट पर कड़े मुकाबले में किसी की भी जीत हो सकती हैं। यह सीट बीजेपी के खाते जा सकती हैं और ऐसा होता हैं तों टोंक में कांग्रेस के पक्ष में 3-1 से लीड रह सकती हैं। जबकि 2013 के चुनावों में बीजेपी ने जिले की चारों सीटों पर जीत हासिल की थी।

 

देवली-उनियारा विधानसभा सीट (97)

उनियारा विधानसभा सीट से 2008 में परिसिमन के बाद देवली-उनियारा सीट बनी। यह सीट मीणा-गुर्जर-माली-धाकड़-जाट मतदाताओं के बाहुल्य वाली सीट हैं। इस सीट पर बीजेपी ने पहली बार इतिहास बदलते हुए अपने विधायक राजेंद्र गुर्जर को दोबारा चुनाव में उतारा। वही दूसरी ओर कांग्रेस ने हाल ही में बीजेपी छोडकर आए पूर्व डीजीपी व दौसा सांसद हरीशचंद्र मीणा को अपना उम्मीदवार बनाया हैं। इस सीट पर कांटे का मुकाबला माना जा रहा हैं इसके पीछे बड़ी वजह राजेंद्र गुर्जर का निरंतर क्षेत्र में रहना व युवाओं की उनकी पकड़ का होना। वही हरीशचंद मीणा का एकबडा नाम होना व मीणा और एससी-एसटी मतदाताओं की तादात अधिक होना इस पर मुकाबलें का रोचक बना रहा हैं। ऐसा पहली बार हुआ कि जब बीजेपी ने इस सीट पर किसी को भी दूसरी बार टिकट दिया हो। राजेंद्र गुर्जर के सामने गुटबाजी एक बड़ी चुनौती रही हैं वही हरीश मीणा के सामने नया चेहरा होना और भौगोलिक दृष्टि से विधानसभा सीट का क्षेत्रफल दूर तक फैला होना मुश्किल भरा रहा हैं। 2 लाख 64 हजार 853 मतदाताओं वाली इस सीट पर 7 दिसंबर को हुए मतदान में 2 लाख 64 हजार 405 मतदाताओं में से एक लाख 86 हजार 584 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस सीट पर 448 सरकार कर्मचारियों ने पोस्टल बेलेट के माध्यम से मतदान किया था। वह इसी सीट पर 70.57 प्रतिशत मतदान हुआ। जिसमें शहरी क्षेत्र में 16 हजार 161 वोट डाले गए। वही ग्रामीण क्षेत्र में एक लाख 70 हजार 423 वोट डाले गए। इस सीट पर अब हुए 15 चुनावों में अधिकाशतः कांग्रेस का कब्जा रहा हैं। बीजेपी से तीन बार ही जीत हासिल हो पाई हैं। जिसमें सबसे बड़ी जीत राजेंद्र गुर्जर के ही नाम है। जिन्होेने पिछले चुनावों में काग्रेस के दिग्गज नेता रामनारायण मीणा को 29 हजार 633 मतों हराकर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी। इस सीट पर कड़े मुकाबले में अगर एक बार फिर राजेंद्र गुर्जर जीत जाते हैं तों कोई बड़ी बात नही होगी।

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