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टोंक में बदहाल उद्योग-बढते बेरोजगार

By on December 2, 2018 0 116 Views
चुनावी माहोल में भले ही राजनैतिक पार्टियों के नुमाइंदे बडे-बडे दावे कर रहे हैं लेकिन आजादी के 70 सालों के बाद टोंक षहर का अधिकतर युवा बेरोजगार घूम रहा हैं। बात अगर इस चुनाव की करे तों टोंक से पीसीसी प्रेजीडेंट सचिन पायलट और सीएम वसंुधरा राजे के नंबर एक मंत्री युनूस खान चुनाव मैदान हैं। रो लेकिन वोट मांगने के दोनों नेता बडे-बडे दावे तो कर रहे हैं टोंक की औद्योगिक क्षेत्र के विकास को लेकर अब तक दोनो की चुप्पी यहां के यहां के हजारों बेरोजगारो के जख्मों पर नमक रगड़ने जैसा हैं। टोंक षहर में राजनैतिक नुमाइंदों प्रषासन की अनदेखी के चलते जिला मुख्यालय स्थित उद्योग धंधे ही नही औद्योगिक क्षेत्र भी विरान हो चुके हैं। हालात यह है कि टोंक षहर में स्थित एकमात्र इंडस्ट्रीयल एरिया की अधिकतर फैक्टिया बंद पड़ी हैं, जिसकी वजह से यहां पर हजारों की संख्या में युवा बेरोजगार हो घूमनें को मजबूर हैं। जबकि कई रोजगार की तलाष में यहां से बडे षहरों की ओर रूख कर चुके हैं। लोगो का आरोप है कि आजादी के इतने साल के बावजूद जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों ने यहां पर औद्योगिक क्षेत्र की बदहाली पर ध्यान नही दिया और एक के बाद एक फैक्ट्रियां बंद होती गई और उसके साथ ही बेरोजगार की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी होती गई। जानकारी के अनुसार वर्तमान में षहर में 103 फैक्ट्रियां में से 48 बंद पड़ी हैं जबकि प्रषासन की माॅनीटरिंग के अभाव में उद्योग धंधे बर्बाद होते जा रहे हैं, जिससें आमजन में जनप्रतिनिधियों के प्रति खासा आक्रोष हैं
वही दूसरी ओर टोंक षहर में बेरोजगारी के जितने जिम्मेदारी प्रषासन और राजनैतिक नेता हैं, उतने ही जिम्मेदार मजदूर नेता भी हैं जो प्रभाव जताने के नाम पर फैक्ट्री संचालकों से बैर ले लेते हैं और उसका खामियाजा फैक्टियों में काम करने वाले मजदूरों को भुगतना पड़ता हैं। हजारों मजदूरो को रोजगार देने वाली इसुजु गारमेंट एवं डीसीएम फैक्ट्री कुछ इन्ही कारणों की वजह से बंद हो गई आज उनमे काम करने वाले हजारों बेरोजगार यहां तो टोंक से पलायन कर चुके है या फिर बेरोजगार घुमने पर मजदूर हैं। वही स्थानीय लोगो में यहां से चुनने वाले जनप्रतिनिधियों के प्रति खासा आक्रोष हैं, लोगो को आरोप है पिछले कुछ सालों में रोजगार के प्रति सरकार ने बिलकुल ध्यान नही दिया और पढ़े-लिखे और काबलियत होने के बावजूद ना तो उन्हे रोजगार नही मिल पा रहा है ना ही यहां औद्योगिक धंधों एवं फैक्ट्रियां विकसित करने को लेकर कोई कारगर कदम उठाए गए।
 चुनाव को समय है और टोंक विधानसभा से भाजपा एवं कांग्रेस कद्दावर नेता मैदान में हैं, जिससंें यहां के लोगो को उम्मीद जगी है। रोजगार को लेकर कोई कारगर कदम उठाए जाएंगे लेकिन जुलाई 1978 के औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना के साथ षुरू की गई 103 फैक्ट्रियों में 1000 के करीब मजदूरों की तुलता में आज 48 तो हो चुकी है जबकि मजदूरों की संख्या आधी हो चुकी हैं जिनमें से पंजीकृत मजदूर इनमें से भी आधे यानि 250 के करीब ही मंजीकृत मजदूर हैं बाकि को फैक्ट्री संचालक कभी भी निकाल सकते हैं। ऐसें चुनावी समय में औद्योगिक विकास को लेकर उम्मीद बढ़ी हैं पर नेताओं के भाशणों में एक-दूसरे के खिलाफ आरोप-प्रत्यारोप के अलावा कुछ नही दिख रहा हैं।
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