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सवर्णाे को आरक्षण के संविधान संशोधन बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती।

By on January 11, 2019 0 71 Views

 

सामान्य वर्ग के गरीबों के लिए शिक्षा और नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण के संविधान संशोधन विधेयक को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। यूथ फाॅर इक्वैलिटी ने संविधान संशोधन को चुनौती देते हुए याचिका में कहा कि यह संशोधन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है और आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कानून र६ करने की मांग की है। याचिका में कहा गया है कि आर्थिक आरक्षण का प्रावधान करने वाला संसद से पास बिल सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसले का उल्लंघन करता है। यूथ फाॅर इक्वैलिटी दायर याचिका में इन्दिरा साहनी फैसले का हवाला देकर कहा गया है कि सिर्फ आर्थिक आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। ये असंवैधानिक है। इससे पहले बुधवार को सामन्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में 10 फीसदी आरक्षण पर राज्यसभा में भी मुहर लग गई। लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी बुधवार को सामान्य वर्ग के गरीबों के आरक्षण संबंधी 124वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित कर दिया। राज्यसभा ने 7 मुकाबले 165 मतों से सवर्ण गरीबों को आरक्षण देने संबंधी संविधान के अनुच्छेद 15 और 16 के तहत किया गया है। और इसीलिए इसे राज्यों की विधानसभा से पारित कराने की जरूरत नहीं होगी। अब केवल राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 10 फीसद आरक्षण की यह व्यवस्था लागू हो जाएगी। राज्यसभा ने आरक्षण संबंधी संविधान बिल को पारित करने से पहले इसे सिलेक्ट कमेटी में भेजने की द्रमुक सांसद कनीमोरी के प्रस्ताव को भी 18 के मुकाबले 155 मतों से खारिज कर दिया। राज्यसभा में आठ घंटे तक बिल पर हुई मैराथन चर्चा का जवाब देते हुए सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत ने कहा कि सामान्य वर्ग की गरीब लोगों को इसके जरिए सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण का लाभ मिलेगा। बिल को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होने कहा कि सरकार की इसको लेकर यह गंभीरता ही रही कि संविधान संशोधन के जरिये आरक्षण का यह प्रावधान किया जा रहा है। इसीतिए उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट भी संविधान संशोधन की इस प्रक्रिया को मान्य करेगा।

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