September 25, 2018
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दाह संस्कार के लिए सर्वोत्तम गो काष्ट…..

By on August 12, 2018 0 408 Views

 

 गांधी गोशाला में नवाचार के साथ होती गोसेवा।

टोंक न्यूज़ ” वैदेही छापरवाल “:–टोंक में संचालित गांधी गोशाला समित्ति के अध्यक्ष राजेंद्र पराणा सहित समित्ति के प्रयासों का नतीजा है कि गोशाला में गायो की सर्वोच्च सेवा के साथ ही नवाचार के रूप में समित्ति गो काष्ट बनाकर दाग संस्कार के लिए उपलब्ध करा रही है जिसके चलते न सिर्फ समय की बचत होती है बल्कि पूर्ण दाग संस्कार आर्थिक बचत के साथ संस्कारिक विधि-विधान से भी हो रहा है,ओर गो काष्ट की बिक्री से प्राप्त पैसे को भी पुनः गो सेवा में ही लगाया जाता है।

समित्ति के प्रयासों से मिल रहा फायदा ओर इसी का नतीजा है कि गांधी गोशाला में निर्मित होती गोकाष्ट से अब लोग अपने स्वर्गीय परिजनों के दाग संस्कार में रुचि दिखा रहे है तो समित्ति के लोग भी सेवा भावना से हर तरह से मदद करते है,समय पर लोहे के जंगले सहित पूर्ण मात्रा में गोकाष्ट समय पर पहुचाने का कार्य किया जाता है और इसका फायदा यह होता है कि
जेसे ही समित्ति के सदस्यों को बताया जाता है कि आज दाहसंस्कार होना है समित्ति के लोग मोक्ष धाम में लोहे का जंगला और पर्याप्त मात्रा में गो काष्ट पहुचाने तक का कार्य करते है , परिजन जब तक दिवंगत आत्मा के पार्थिव शरीर को ले कर मोक्ष धाम पहुचते है तो वहा गो काष्ट और लोहे के जंगले सहित गांधी गो शाला के मेनेजर या सदस्य के रूप में कोई न कोई जंगले में लगभग 3-4 परत गो माता के गोबर से बनी हुई रोल टाइप लकडिया के साथ वंहा मौजूद मिलते है जो कि गांधी गोशाला की सेवा भावना का परिणाम है ।
 कैसे होता है प्रयोग:–

दाहसंस्कार में गोकाष्ट के साथ चुनी गयी चुनी गई दो-तीन परतों पर कुछ कपूर का प्रयोग किया जाता है और डेड बोड़ी को लिटा कर बाकी जंगले में पुन: गो काष्ट से ढक दिया गया …और मृतात्मा के परिजनों की मुखाग्नि के बाद गो काष्ट द्वारा दाह संस्कार होता है यह कई लोगो के उत्सुकता और जिज्ञासा का विषय भी होता है पर कुछ ही क्षणों में गाय के गोबर से निर्मित गो काष्ट तेज अग्नि का रूप धारण कर लेती है और देखत ही देखते मात्र 45 से 50 मिनट के बीच में मृत शरीर अग्नि के रूप में जल कर राख में परिवर्तित हो जाता है ।

  खर्चे में होती है बचत ओर पवित्र दाहसंस्कार–

गोकाष्ट से दाहसंस्कार का फायदा यह भी है कि इस पूरे ईंधन का खर्च भी मात्र लाने ले जाने सहित 2000 रुपये से 25 के बीच ही आता है जबकि लोग बाजार से जो लकड़ी छाने आदि लाते हे वो कम से कम 5000 की होती हे आर्थिक रूप से तो ये बचत हे ही किन्तु सबसे महत्वपूर्ण बात ये हे की ये 2000 से 25 हजार के बीच जो रुपये जाते है वह भी गो शाळा में गो सेवा के निमित्त ही प्रयोग होंते है जो गो वंश की सुरक्षा का सम्बल होगा वही दाह संस्कार के लिए जो लकड़ी बाजार से लाई जाती हे वो गीली होती हे तो पार्थिव शरीर को जलाने में धुंआ तो होता ही हे काफी समय भी लगता हे और इस लकड़ी के जलने से कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होता हे जो पर्यावरण के लिए भी प्रतिकूल हे …साथ ही यदि लकड़ी ज्यादा सूखी होती हे तो उसमे हजारो जीव होते हे जिनकी जिव हिंसा के हम दोषी बनते हे दूसरा पहलू ये भी एक दाह संस्कार में लगभग 5-6किवंटल लकड़ी का प्रयोग यानि एक सामान्य वृक्ष की हत्या का दोष भी लोगो को वर्तमान परिस्थितियों में पर्यावरण संतुलन के लिए गोकाष्ट से दाहसंस्कार बेहतर विकल्प है जिसे अपनाया जाना चाहिये ।

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