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दिल्ली का असर जयपुर में, जहरीली हुई गुलाबी नगरी

By on November 22, 2018 0 38 Views

 

राजधानी जयपुर रिपोर्ट कि अनुसार पूरे प्रदेशभर में सबसे ज्यादा प्रदूषण वाला शहर है। जिससे लगभग पूरे प्रदेश की हवा जहरीली हो चली है। बढ़ते वायु प्रदूषण से सांस की बीमारियों के मरीज बेतहाशा बढ़ रहे है। राजस्थान सरकार व यूनीसेफ के आंकेड़े इस सच्चाई को बयां कर रहे हैं। वायु गुणवत्ता श्रेणी के अनुसार जयपुर की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। वहां की हवा तो स्वस्थय लोगों को प्रभावित कर रही है, जबकि जोधपुर दूसरे स्थान पर है। हाल यही रहा तो वह दिन दूर नहीं जब अस्थमा, फेफड़े व हृदय रोगियों का आंकड़ा ऊंचाइयां छू लेगा। खास तौर पर इस चुनाव मे तो। अनेक पार्टियों द्वारा वाहनों से होता धुंआधार प्रचार। गांवों से लोगों का पलायन। खुली एवं आॅक्सीजन युक्त हवा की कमी। कैसे रूकेगा प्रदूषण? जयपुर में अब मानक से 5 गुना अधिक प्रदुषण बढ़ गया। अब देखिए इस समय जयपुर में करीब 15 लाख से भी अधिक वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। पिछले पांच सालों में इन वाहनों की संख्या बढ़कर 50 लाख हो गई। सड़कें बढ़ी नहीं। हर रोज करीब 4 से 5 लाख इस शहर में आते है फिर चले जाते है। शहर में करीब 15 लाख माइग्रेटेड होकर रह रहे हैं। इन सबके लिए स्वस्थ वातावरण हवा, नागरिक सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था तक नहीं हैं। फिर स्वस्थ जीवन जीना सुलभ कैसे होगा।
प्रदूषण बढ़ने का मुख्य कारण है शहर में निरन्तर सल्फरडाई आॅक्साइड और नाइट्रोजन का बढ़ना है। इस समय शहर में सल्फरडाई आक्साइड का मानक स्तर है 80 मिलीग्राम प्रतिघन मीटर। इसलिए इसका स्तर 25 से 45 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर तक पहुंच गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट ने तो कहा है कि जयपुर शहर निर्धारित मानकों से ढ़ाई गुना अधिक प्रदूषित है। यह चिन्ताजनक है। इससे लोगों की जीवन शक्ति धीरे-धीरे क्षीण हो रही है। एलर्जी अस्थमा के रोगी निरन्तर बढ़ रहे हैं। दोपहिया वाहन चालक इस प्रदूषण से अधिक एलर्जी एवं अस्थमा पीड़ित है। इस प्रदूषण की रोकथाम के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाएं जा रहे हैं। यदि यही हालात रहे तो यह शहर दमघोटू शहर हो जाएगा। जहां जीवन जीना तक दूभर जो जाएगा। चाहर दीवारी और औद्योगिक क्षेत्रों में ये रोग अधिक बढ़ रहे है। प्रदूषण रोकना हर व्यक्ति संस्था, संस्थान, नगर निकायों और सरकार के हाथ में है। इसके लिए कुछ कदम युद्ध स्तर उठाने होंगे।

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