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विभाग के अधिकारी कभी एंबुलेंसों की जांच तक नहीं करते

By on October 19, 2018 0 57 Views

मरीज़ों की जान खटारा एंबुलेंसो के भरोसे।

चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही देखने को मिलती है अगर बात स्वास्थय की हो रही हो। मरीज व स्वास्थ्य को लेकर चिकित्सा विभाग ने अपने किसी भी क्षेत्र में ठीक से पकड़ नहीं बना रखी है। ये अधिकारियों की बड़ी लापरवाही है कि जिस में मरीज को अस्पताल लाया जाता है वो ही ठीक प्रकार से सुरक्षित नही ंतो मरीज की जान का क्या भरोसा। चिकित्सा विभाग के आराम परस्त अधिकारियों को इतनी भी फुरसत नहीं की कभी एंबुलेसों पर ध्यान दे ले कि वह चलने लायक हालत में है भी या नहीं। विभाग के लगभग सभी अफसरों को बखूबी मालूम है कि जिले की ज्यादातर एंबुलेंस खटारा है लेकिन आराम परस्त अधिकारी सोचते है जब तक चल रही है चलने दो अपना क्या जाता है। जबकि प्रदेश सरकार जीवीके-ईएमआरआई कंपनी को प्रदेशभर के मरीजों को तत्काल अस्पतालों तक पहुंचाने और बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रतिमाह 16 करोड़ 10 लाख रुपए भुगतान करती है। कंपनी उदयपुर जिले में एंबुलेंस सेवा के नाम पर 80.32 लाख रुपए वसूल रही है। हकीकत यह है कि अधिकतर 104 और 108 एंबुलेंस बिना ऑक्सीजन सिलेंडर, सक्शन मशीन, सिरिंज इंफ्यूज पंप, फायर एक्सटेंग्यूशर, ऑटोमेटेड ट्रॉली के बिना ही जिंदगी-मौत से जूझते मरीजों को लेकर दौड़ती हैं। शहर के साथ ग्रामीण इलाकों में चलने वाली कई एंबुलेंस पूरी तरह से कचरा हो गई हैं। लगता है कि जो मरीज बचने की हालत में हो वो भी इसमें सवार होकर अस्पताल जाए तो रास्ते में ही दम तोड़ दे। बावजूद इसके इन्हें हटाकर नई एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं की जा रही है। आपको बता दे की मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली जीवनदायनि एंबुलेंसों में कई जगहों पर 104-108 इमरजेंसी सेवा में मरीजों की जगह सामान ढोने का काम किया जा रहा है। ऐसे में कंपनी सरकार के नियमों की तो धज्जियां तो उड़ा ही रही है, साथ ही आम जन की जिंदगी के साथ खिलवाड़ भी कर रही है।
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग उदयपुर के संयुक्त निदेशक डॉ. अखिलेश माथुर और सीएमएचओ डॉ. दिनेश खराड़ी ने कहा कि कंपनी को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है कि इमरजेंसी सेवा एंबुलेंस से सामान क्यों ढोया गया जबकि वो सिर्फ 24 घंटे मरीजों के लिए है ओर सभी एंबुलेंसों में ऑक्सीजन सिलेंडर, सक्शन मशीन, सिरिंज इंफ्यूज पंप, फायर एक्सटेंग्यूशर जैसे उपकरण मौजूद क्यों नहीं है? एक-एक एंबुलेंस की तथ्यात्मक रिपोर्ट के लिए आरसीएचओ डॉ. ताराचंद गुप्ता, डीपीएम डॉ. जीएस राव के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम का गठन किया गया है। ये टीम सीएमएचओ डॉ. खराड़ी को तीन दिन में रिपोर्ट पेश करेगी।

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