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जनप्रतिनिधियों की गुटबाजी के चलते नही हो पाया टोंक में विकास….

By on September 8, 2018 0 261 Views

शहर की जनता की नही है कोई सुनने वाला….

गडडों में तब्दील है टोंक की सडकें….

टोंक।(रोहित कुमार) टोंक जिला मुख्यालय पर सडको के हालात ऐसे बिगडे है कि राहगीरो का दो-चार कदम चलना भी मुश्किल है, लेकिन टोंक कि जनता कि सुनने वाला कोई नजर नही आता है, हालात इस कदर बिगडे है कि समझ ही नही आता है कि सडको पर गडडे है या गडडो वाली सडक उपर से किचड का आलम यह है। जिला मुख्यालय पर बारिश आने के बाद तो इन सडकों पर चलना भी मुष्किल हो जाता है। जनप्रतिनिधियों की गुटबाजी के चलते टोंक में विकास नही हो पाया है। इसी बात का परिणाम नाम है कि सारा शहर किसी गांव कि कच्ची सड़क नजारा पेश कर रहा है पर जनता की तकलीफे जनता ही जाने। सड़क पर फैले इस किचड से लबालब इस सड़क पर वाहनों का निकलना मुश्किल नजर आ रहा है। ऐसे में पैदल चलना किसी गांव की पगडं़डी पर चलने के समान है पर जनता किससे कहे कोई सुनता ही नहीं है।
हालात यह है कि मंदिर आने-जाने वालों को काफी परेषानी का सामना करना पडता है। क्योकि शहर के कंकाली माता मंदिर पर हर रोज श्रद्वालु माता के दर्षन करने आते है,लेकिन इस रोड के हालात बहुत ही बुरे है यहां से गुजरने वाले लोग इन गडडों व किचड वाली सडकों से काफी परेषान है। आये दिन यहां पर दुर्घटनाएं होती हैं। लेकिन यहां की जनता की काई सुनने वाला नही है। टोंक षहर में आने से पहले लोगो का गडडों व गडडों में तब्दील सडको से स्वागत  होता है। क्योकि जयपुर रोड से छावनी सर्किल तक का रोड पूरा गडडों में तब्दील है। लोगो को कहना है कि यहां से रोजना बडे-बडे वाहन गुजरते है वाहन गुजरते समय इतनी धूल मिटटी उडती है कि सांस लेने में भी तकलीब होती है। कहना है कि कई बार षिकायत की लेकिन कोई सुनने वाला नही है। यहां से हर रोज जनप्रतिनिधी व बडे अधिकारी भी गुजरते है लेकिन उन जनप्रतिनिधियों को जनता से कोई सरोकार नही है। टोंक के जनप्रतिनिधी विकास की तो बात करते है लेकिन विकास कहा हुआ है इसका पता तो जनप्रतिनिधीयों को भी नही है। टोंक शहर की सड़कों की हालत ऐसे ही नहीं बिगड़ी है, रूडीफ और जलदाय विभाग में सिवरेज और पेयजल लाइनों के नाम पर शहर की सड़कों को ऐसा खोदा कि शहर के हालात गांवों से बत्तर हो गये और उलटा जनता ने पेयजल की सौगात मिली और न ही सिवरेज लाइन का कहीं आता पता।
वही शहर की जगह-जगह की सडके टूटी हुई है लेकिन ध्यान देना वाला कोई भी नजर नही आता है। जनता षिकायत भी किससे करे यहां तो जनप्रतिनिधियों की गुटबाजी के चलते टोंक का विकास ही नही पाया है। इन गडडों में तब्दील सडकों से आये दिन लोगो के वाहन खराब हो रहे है। टोंक षहर में हो रहे सीवरेज और पेयजल लाईन के लिए 388 करोड लागत से करवाये जा रहे काम भले ही भविष्य में लोगो के लिए सुविधा में इजाफा करे। पूरे षहर में सडकें खुदने के बाद हालात बद से बदतर हो गये है। थोडी सी बरसात होते ही सडकें दलदल में बदल रही है। वही इसी महिने में 27 सितम्बर को राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का टोंक जिलें में दौरा भी है। लेकिन जिलें में सडकों के हालात बहुत ही बुरे है। टोंक विधायक अजीत सिंह मेहता ने भी पिछले महिने में टोंक की बदहाल सडकों का निरीक्षण भी किया था और उन्होनें कहा था कि सितम्बर माह में टोंक की सडकों के हालात सुधर जायेगे लेकिन टोक की सडकों के हालात तो और भी बिगड गये है।
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