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अनुभवी व युवा सरकार का राज शुरू।

By on December 18, 2018 0 68 Views

 

राजधानी जयपुर के अल्बर्ट हाॅल पर आयोजित भव्य समारोह में अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल कल्याण सिंह ने गहलोत को मुख्यमंत्री व सचिन पायलट को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाई। बाद में मुख्यमंत्री के आग्रह पर राज्यपाल ने सचिन पायलट को उपमुख्यमंत्री घोषित किया, समारोह में बकायदा इसकी घोषणा करवाई गई। संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक उप मुख्यमंत्री पद नहीं होता, इसलिए मंत्री पद की ही शपथ होती है। अल्बर्ट हाॅल पर हुए शपथ ग्रहण समारोह में बड़ी तादाद में कांग्रेस कार्यकर्ता और आम जनता उमड़ी। कार्यकर्ता अल सुबह 6 बजे से ही आना शुरू हो गए थे। कई कार्यकर्ता उत्साह में नाचते गाते और ढोल बजाते हुए भी समारोह स्थल पहुंचे। सुबह 6 बजे से लेकर 10.30 बजे तक कार्यकर्ताओं के आने का सिलसिला जारी रहा।

2019 के लिए राहुल गांधी द्वारा महागठबंधन का मैसेज

अशोक गहलोत और सचिन पायलट का शपथ ग्रहण समारोह राजस्थान में ताकत दिखाने के साथ ही देश की राजनीति में भाजपा विरोधी दलों के जमावड़े का मंच बन गया। विपक्षी दलों के इस जमावड़े के जरिए कांग्रेस ने लोकसभा चुनावों में भाजपा विरोधी एक मजबूत महागठबंधन बनाने का मैसेज देने का प्रयास किया है। शपथ समारोह में भाजपा विरोधी दलों के प्रमुख नेताओं का आना इसी का मैसेज है। भाजपा विरोधी विपक्षी पार्टियों के नेता एयरपोर्ट से अल्बर्ट हाॅल और वापस एयरपोर्ट एक ही बस में बैठकर आए और गए। राहुल गांधी दोनों बार विपक्षी नेताओं के साथ बस मे आए और गए। समारोह में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार, पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, कर्नाटक सीएम जेडीएस नेता एचडी कुमार स्वामी, एलजेडी प्रमुख शरद यादव, नेशनल काॅन्फ्रेंस नेता फारूख अबदुल्ला, आंध्रप्रदेश सीएम और टीडीपी चंद्रबाबू नायडू, असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष बदरू६ीन अजमल, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, डीएमके नेता एमके स्टालिन और कनीमोझी, झारखंड मुक्ति मोर्चा के हेमंत सोरेन और स्वाभिमान पक्ष पार्टी के राजू शेट्टी ने शिरकत की।

राजे-गहलोत मिले आत्मीयता के साथ, राजे ने दी शुभकामनाएं

कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे भी उपस्थित रही। राजे को मंच पर प्रथम पंक्ति में बैठाया गया था। शपथ से पहले जब गहलोत और पायलट मंच पर आए तो राजे ने दोनों से आत्मीयता के साथ मुलाकात की। राजे ने काफी देर तक गहलोत के दोनों हाथ पकड़े और हंसते हुए बातचीत की। संयोग की बात है कि राजे ने दोनों बार गहलोत से ही सत्ता ली और दोनों बार गहलोत को ही सत्ता लौटाई। भले ही दोनों चुनाव प्रचार में एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते रहे हों लेकिन सत्ता हस्तांतरण के समय दोनों हसमुख नजर आए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में वसुंधरा राजे ने गहलोत से ही सत्ता ली थी और इससे पहले भी इसी तरह आदान-प्रदान हुआ था।

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