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हरियाणा ने राजस्थान को नहीं दिया पानी : गहलोत

By on January 12, 2019 0 7 Views

 

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अन्तर्राज्यीय ज समझौतों की पूर्ण रूपेण पालना करवाने के लिए केन्द्र सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह करते हुए कहा कि ताजेवाला हैड से राजस्थान को आवंटित यमुना जल के सम्बन्ध में हरियाणा सरकार द्वारा अब तक सहमति नहीं दिये जाने के फलस्वरूप राजस्थान पिछले 24 वर्षो से अपने विधि संगत अधिकारों से वंचित हो रहा है। इसके चलते प्रदेश के चूरू, झुन्झुनू एवं सीकर जिले की जनता सिंचाई सुविधा एवं पेयजल से वंचित हो रही है। इसी प्रकार ओखला हेड से भी राज्य के भरतपुर जिले को अपने हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल रहा है। गहलोत ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुर्नरूद्धार मंत्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में रेणुकाजी बांध बहुउ६ेशीय परियोजना के लिए छः राज्यों के मध्य हुए अनुबंध पर हस्ताक्षर के लिए आयोजित समारोह में यह बात कही। उन्होंने बताया ताजेवाला हैड पर आवंटित जल को राजस्थान ले जाने के लिये वर्ष 1994 में पांच राज्यों के मध्य एम.ओ.यू. के अन्र्तगत वर्ष 2003 से हरियाणा सरकार से एम.ओ.यू. पर हस्ताक्षर करवाने के लिये लगातार प्रयास किये जा रहे है, जिससे परियोजना की लागत में अत्यधिक वृद्धि हुई है। गहलोत ने कहा कि हरियाणा सरकार को एम.ओ.यू. पर शीघ्र सहमत कराये जाने हेतु निर्देश प्रदान किये जो जिससे राजस्थान को उसके हिस्से का जल प्राप्त हो सके। ओखला हेड से राज्यके भरतपुर जिले को अपने हिस्से का पूरा पानी नहीं मिल रहा है। गत 17 वर्षो के आंकड़ों के अनुसार राजस्थान को उपलब्ध पानी का लगभग 40 प्रतिशत पानी ही प्राप्त हुआ हैं। जिसका मुख्य कारण सही मात्रा में पानी नहीं छोड़ा जाना एवं पानी का अवैध दोहन किया जाना है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि हरियाणा एवं उत्तरप्रदेश राज्यों को अपने क्षेत्र में राजस्थान के हिस्से के जल का अवैध दोहन रोकने एवं राज्य के हिस्से का पानी दिलाने का निर्देश प्रदान करावें। गहलोत ने केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री से आग्रह किया कि पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना के माध्यम से राजस्थान के 13 जिलों झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाईमाधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर दौसा, करौली, अलवर, भरतपूर, एवं धौलपुर जिलों में पेयजल एवं 2 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में नवीन सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने की महत्वकांक्षी परियोजना पर मध्यप्रदेश द्वारा अन्र्तराज्यीय जल के संबंध में किये जा रहे आक्षेप सही नहीं है। परियोजना की रिर्पोट राजस्थान एवं मध्यप्रदेश के मध्य वर्ष 1999 एवं 2005 में हुए समझोते के अनुसार बनाई गयी है। अतः मध्यप्रदेश के आक्षेपों को खारिज कर पूर्वी राजस्थान की नहर परियोजना की डी.पी.आर. का केन्द्रीय जल आयोग से शीघ्र अनुमोदन करायें।

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इंसेंटिवाइजेसन स्कीम फाॅर ब्रिजिंग इरीगेशन गेप (आई.एस.बी.आई.जी.) योजना की चर्चा करते हुए बताया कि राजस्थान में भारत सरकार के सिंचित क्षेत्र विकास एवं जल प्रबंधन कार्यक्रम के अंतर्गत केंद्रीय सहायता से चल रही सात परियोजनाओं को अपै्रल 2017 से बन्द कर दिया गया है तथा इसके स्थान पर इंसेंटिवाइजेसन स्कीम फाॅर ब्रिजिंग इरीगेशन गेप योजना प्रस्तावित की गई है परन्तु केन्द्र सरकार द्वारा योजना के क्रियान्वयन हेतु अभी दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए है जिसकी वजह से किसानों का सिंचाई का वांछित लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस योजना के अन्तर्गत पूर्व में संचालित सात परियोजनाओं में शेष बचे 6 लाख 83 हजार 656 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र तथा राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित आठ नवीन योजनाओं के 3 लाख 5 हजार 862 हेक्टेयर कमांड क्षेत्र के लिये कुल 6193 करोड़ रूपये केंद्र सरकार की मंजूरी के लिये लंबित है।

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