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कितने सफल होंगे केसीआर

By on December 31, 2018 0 65 Views

भारतीय राजनीति हमेशा दक्षिण भारत के प्रसिद्ध राजनेताओं से ऊर्जावान रही है। के. चंद्रशेखर राव ( जिन्हें प्यार से केसीआर भी कहा जाता है ) ऐसे प्रसिद्ध चेहरों में हाल में शामिल हुए हैं। तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राश्ट समिति के अध्यक्ष ने हाल ही में कहा है कि 2019 में केंद्र सरकार के गठन में मैं अहम भूमिका निभाऊंगा 1 प्रतीशत केसीआर के पास एक नई राजनीतिक योजना है। 2019 के लिए मोदी बनाम राहुल के शोर के बजाय केसीआर की योजना कुछ अलग है। उनका सवान है कि उन क्षेत्रीय दलो की अनदेखी क्यों की जाती है, जो कांग्रेस और भाजपा, दोनों का विरोध करते हैं।

हम नए संघीय मोर्चे के गठन की कोशिश क्यों नहीं कर सकते? इस बात से आश्रस्त होकर, कि 2019 के लोकसभा चुनाव में टीआरएस 15 लोकसभा सीटें जीत लेगी, केसीआर ने उत्तर भारत की क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियों के नेताओं से मिलना-जुलना शुरू कर दिया है। बीजू जनता दल के अध्यक्ष नवीन पटनायक और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी से उन्होंने यही बात की। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेष यादव और बसपा प्रमुख बहन मायावती से केसीआर को मोदी और कांग्रेस-विरोधी गठबंधन के बारे में चर्चा करनी है। केसीआर को तेलंगाना में लघु महागठबंधन को हराने का श्रेय जाता है, जहां चंद्रबाबु नायडू की तेदेपा और कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में महागठबंधन बनाया था।

ममता बनर्जी और नवीन पटनायक से बातचीत करने के बाद केसीआर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बुधवार को नई दिल्ली में क्या बताया? ममता बनर्जी खासकर राहुल गांधी के चलते व्यक्तिगत रूप से कांग्रेस को महत्व नहीं देना चाहतीं, यह संदेश केसीआर ने स्पश्ट शब्दों में प्रधानमंत्री को बताया। ऐसा ही विचार नवीन पटनायक का भी कांग्रेस के प्रति है।

दिलचस्प बात यह है कि तेलंगाना में मुस्लिमों के बेहद करीबी केसीआर 2019 में केंद्र सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाना चाहते हैं। चूकि वह तेलंगाना में हिंदू मतदाताओं के भी करीब हैं, इसलिए अपनी धर्मनिरपेक्ष साख की बदौलत उन्होंने चंद्रबाबू षैली की राजनीति को हराने का संकल्प लिया है। आंध्र प्रदेश में एक बैठक में चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि वरिश्ट नेता होने के कारण वह भी प्रधानमंत्री पद के लिए योग्य हैं। इस बयान ने केसीआर को भड़का दिया। तभी से तेदेपा को आंध्र प्रदेश से मिटाने के लिए केसीआर ने काफी मशक्कत की। केसीआर इस प्रयास में सफल या विफल हो सकते हैं, पर तेलंगाना विधानसभा के नतीजे ने दिखा दिया है िकवह किंगमेकर हैं।

केसीआर के पुत्र केटी रामाराव तेलंगाना में मंत्री हैं। केसीआर की बेटी कविता सांसद हैं। कविता अक्सर अखिलेश यादव की पत्नी से मिलती रहती है। कविता का मायावती व बसपा के साथ भी अच्छा रिश्ता हैं। इसलिए पारिवारिक रिश्ते के आधार पर केसीआर चाहते हैं कि उनके बेटे और बेटी चंद्रबाबू के खिलाफ प्रचार करें। नई दिल्ली में कविता ने पिता के लिए संपर्क बनाए हैं। वह लोकसभा में अच्छी हिंदी बोलती हैं।

साफ दिखता है कि चाहं वह युपीए हो या संघीय मोर्चा, एनडीए के खिलाफ एक मजबूत विकल्प उभर रहा है। क्या केसीआर का खेल राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनने से रोक पाएगा? कम से कम उत्तर भारतीय राजनीति में केसिआर के प्रवेष का राजनीतिक लाभ दिख रहा है। मतदाताओं को कोई भ्रम नहीं है, वे विभिन्न्ा तरह के राजनीतिक विकल्प देख रहें हैं- चाहे तो वे मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ जा सकते हैं या 35 क्षेत्रीय दलों के साथ। कुल मिलाकर यह कांग्रेस के लिए परीक्षा की घड़ी है, क्योंकि वह उत्तर भारत की राजनीति में आए दक्षिण भारतीय नेताओं से संपर्क साध रही है।

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