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20 दिन में भी तेंदूऐ को नहीं पकड़ सकी वन विभाग कि टीम

By on November 1, 2018 0 65 Views

 

 विभाग ने वन क्षेत्र में पांच स्थानों पर पिंजरे लगा रखे हैं।

 

प्रतापगढ़ स्थित सनाढ्य वन क्षेत्र में हुए तेंदुए के हमलों के बाद वन विभाग लोगों के दबाव में अब जंगल के राजा को उसके घर से ही बेदखल करने की कवायद में जुटा है। इसके लिए विभाग ने वन क्षेत्र में 5 पिंजरे लगाए हैं। 50 लोगों की टीम दिन-रात तेंदुए को ढूंढने में लगी हुई है। अहम बात यह है कि तेंदुए के अब तक के हमले और शिकार की घटनाएं वन क्षेत्र में ही हुई हैं। इनमें से एक भी हमला घनी आबादी या राजस्व गांव में नहीं किया गया है। इस बात को वन विभाग के आला अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि अभी तक तेंदुए की उपस्थिति घनी आबादी या राजस्व गांव में दर्ज नहीं की गई है। क्षेत्र के करमेलिया और करचेलिया के लगभग 1500 हेक्टर वन क्षेत्र में इस वर्ष हुई वन्यजीव गणना में तीन तेंदुए की उपस्थिति दर्ज की गई है। गौरतलब है कि इसी वन क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों में ही तेंदुए ने एक बालिका की मौत व एक बालिका को घायल करने और तीन गायों का शिकार किया। ये दो घटनाओं के होने पर क्षेत्रवासियों ने हंगामा शुरू कर दिया। लोगों के प्रदर्शन को देख कर वन विभाग भी हरकत में आया तथा वन विभाग ने पैंथर को पकड़ने कि कोशिशे शुरू कर दी। विभाग ने वन क्षेत्र में पांच स्थानों पर पिंजरे लगा रखे हैं। 10 ट्रेप कैमरों से भी तेंदुए पर नजर रखी जा रही है। विभाग के इन ट्रेप कैमरों में तेंदुए की उपस्थिति लगातार दर्ज भी हो रही है, लेकिन पकड़ने में जुटी टीम को अभी तक एक भी बार तेंदुआ नजर नहीं आया है। इससे पहले भी प्रतापगढ़ जिले में वर्ष 2003 में आदमखोर हुए तेंदुए ने 13 लोगों को अपने मुंह का निवाला बनाया था। इसमें सबसे पहला हमला सियाखेड़ी वनखंड में 3 दिसंबर 2003 को किया था, जिसमें तेंदुए ने एक महिला को अपना शिकार बनाया था। इसके ठीक पांच दिन बाद ही 8 दिसंबर को एक बालक का शिकार किया था। इसके बाद वन विभाग ने ऑपरेशन आदमखोर चलाकर तेंदुए को पकड़ने के प्रयास किए, लेकिन आदमखोर तेंदुआ विभाग के हाथ नहीं आया।
वन विभाग के अधिकारियो का कहना है कि वन्य जीवों के आवास तक आदमी की पहुंच बढ़ने से इनका आवास और विचरण प्रभावित हो रहा है। आमतौर पर तेंदुआ मनुष्यों से दूरी बनाए रखता है। आदमी के सोने और बैठने की स्थिति में यह कई बार छोटा शिकार समझकर गलती से हमला कर देता है। जंगलों में भोजन की कमी के कारण कई बार वन क्षेत्र में चराई के लिए जाने वाले मवेशियों को अपना शिकार बना लेता है। यह प्राणी भी पर्यावरण चक्र की महत्वपूर्ण कड़ी है। हमें इन्हें भी बचाने के प्रयास करने होगें

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