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स्टैच्यू आॅफ यूनिटी’ का हुआ लोकअर्पण

By on October 31, 2018 0 46 Views

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को देश को समर्पित कर दिया है। लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस प्रतिमा का अनावरण उनकी 143वीं जयंती पर किया गया। यह प्रतिमा 182 मीटर ऊंची है जो कि अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से दोगुना ऊंची है। सरदार पटेल की इस प्रतिमा का निर्माण नोएडा के शिल्पकार पद्मभूषण राम वी सुतार ने किया है। सुतार ने अपने 40 साल के करियर में 50 से अधिक प्रतिमाओं को आकार दिया है। बताया जाता है कि यह सुनिश्चित करने के लिए कि प्रतिमा में पटेल का चेहरा वैसा ही दिखे जैसे वे असल में दिखते थे सुतार ने उनकी 2000 से अधिक तस्वीरों का अध्ययन किया। सुतार ने उन इतिहासकारों से भी संपर्क किया जिन्होंने पटेल को देखा था। प्रतिमा के अनावरण से पहले पीएम मोदी ने ट्वीट किया, “देश को एक सूत्र में बांधने वाले आजाद भारत के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की आज 143वीं जयंती है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सरदार पटेल की दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ को देश को समर्पित किया। सरदार पटेल की इस मूर्ति की ऊंचाई 182 मीटर है, जो दुनिया में सबसे ऊंची है। मूर्ति का अनावरण होने के बाद वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने यहां फ्लाईपास्ट किया, इसके अलावा मिग हेलिकॉप्टरों के द्वारा मूर्ति पर फूल भी बरसाए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मूर्ति के पास पहुंच कर यहां पूजा-अर्चना की। सरदार पटेल की इस मूर्ति के अलावा आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वैली ऑफ फ्लोवर्स’ व टेंट सिटी का भी उद्घाटन किया। इस दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह समेत कई बड़े नेता भी मौजूद रहे।

देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में करीब 29.89 अरब रुपये खर्च हुआ है। गुजरात में बनी इस मूर्ति का अनावरण करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों इशारों में कांग्रेस पर पटेल की विरासत को नजरअंदाज करने का आरोप भी लगाया।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के अनावरण समारोह में देश के 33 राज्यों की संस्कृति की झलक दिखाई दी। यूनिटी वॉल से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक सवा दो किमी लंबे मार्ग पर 900 कलाकारों ने खड़े होकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया।

 

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की मुख्य विषेशताएं:-

नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध पर बनी यह मूर्ति सात किलोमीटर दूर से नजर आती है। यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। इससे पहले चीन की स्प्रिंग बुद्ध सबसे ऊंची प्रतिमा थी। इसकी ऊंचाई 153 मीटर है। इसके बाद जापान में बनी भगवान बुद्ध की प्रतिमा का नंबर आता है जो 120 मीटर ऊंची है। तीसरे नंबर पर न्यूयॉर्क की 93 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माण में पांच साल का वक्त लगा। सबसे कम समय में बनने वाली यह दुनिया की पहली प्रतिमा है। लागत 2990 करोड़ रुपए है।
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को सिंधु घाटी सभ्यता की समकालीन कला से बनाया गया है। इसमें चार धातुओं के मिश्रण का इस्तेमाल किया गया है। इससे इसमें बरसों तक जंग नहीं लगेगी। स्टैच्यू में 85 प्रतिषत तांबा इस्तेमाल हुआ है।
स्टैच्यू में लगी लिफ्ट से पर्यटक प्रतिमा के हृदय तक जा सकेंगे। यहां से लोग सरदार सरोवर बांध के अलावा नर्मदा के 17 किमी लंबे तट पर फैली फूलों की घाटी का नजारा देख सकेंगे।
प्रतिमा में सरदार के चेहरे की बनावट तय करने के लिए दस लोगों की कमेटी बनाई गई थी। सभी की सहमति के बाद 30 फीट का चेहरा बनाया गया। इसे 3डी तकनीक से तैयार किया गया है।
पटेल की प्रतिमा के होंठ, आंखें और जैकेट के बटन 6 फीट के इंसान के कद से बड़े हैं। इसमें 70 फीट लंबे हाथ हैं, पैरों की ऊंचाई 85 फीट से ज्यादा है। इसे बनाने में 3400 मजदूरों और 250 इंजीनियरों ने लगभग 42 महीने काम किया।
सरकार स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को पश्चिम भारत के सबसे शानदार पर्यटक स्थलों के रूप में विकसित कर रही है। यहां पर्यटकों के आकर्षण के लिए कई और सुविधाएं बनाई जा रही हैं। पर्यटक यहां रुक भी सकेंगे।
प्रतिमा स्थल पर लेजर शो चलेगा। पास में ही म्यूजियम, रिसर्च सेंटर और फूड कोर्ट होगा। प्रतिमा पर कमर से ऊपर लेजर शो के जरिए सरदार पटेल की जीवन यात्रा दिखाई जाएगी।
सरदार म्यूजियम भी होगा। जहां पटेल से जुड़े 40 हजार दस्तावेज, 2 हजार दुर्लभ फोटो होंगी। नेहरू, अंबेडकर, सरोजिनी नायडू जैसी विभूतियों के संविधान सभा में दिए भाषण के ऑडियो टेप भी म्यूजियम में होंगे।
यहां 45 हेक्टेयर में टाइगर सफारी बनाई जाएगी, कच्छ की तर्ज पर 250 रूम की टेंट सिटी बनेगी, इसमें 500 लोग ठहर सकेंगे सरदार सरोवर बांध से 4 किमी दूर साधु बेट में कच्छ के रण की तरह टेंट सिटी बसाई जा रही है।

 

इस मूर्ति पर हुए खर्च को लेकर सरकार की कई जगह आलोचना भी हो रही है। इंडिया स्पेंड के एनालिसिस के मुताबिक इस मूर्ति को बनाने में जितनी रकम खर्च की गई है, उसमें दो आईआईटी, पांच आईआईएम और मंगल के लिए 6 इसरो केंद्र का निर्माण किया जा सकता है। मूर्ति को बनाने के लिए शुरुआत में जो प्रस्ताव केंद्र सरकार को सौंपा गया था, वास्तव में मूर्ति बनाने में उससे दोगुने से अधिक का खर्च आया है। एनालिसिस के मुताबिक इस रकम से 40,192 हेक्टेयर जमीन को सिंचित किए जाने के साथ, 162 से अधिक छोटी सिंचाई परियोजनाओं का पुनरुद्धार और 425 छोटे बांध बनाए जा सकते थे।

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