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कठीन हे शिक्षा कि डगर……..

By on July 26, 2018 0 177 Views

स्कुल जाने कि राह बहुत मुश्किल…….

 

 

 

 

 बच्चो को अगर शिक्षा के मन्दिर स्कुल के रास्ते कि कठीन डगर कि मुश्किलो से निजात पाने को भी जिला कलेक्टर की दहलीज पर जाकर ग्रामीणो के साथ प्रर्दशन करना पडे ओर जिला कलेक्टर के पास ऐसे बच्चो कि बात सुनने तक का समय तक न हो तो हालात पर अंासु बहाने के सिवा बचता ही क्या हे,यही हकीकत हे टोंक के ककराज गांव के बच्चो कि जिनकी स्कुल जाने कि राह मे सडक पर किचड ही किचड हे ओर जरा सी बरसात क्या हुई स्कुल जाना ही दुश्वार हो जाता है।
 टोंक कलेक्ट्रेड की सीढीयो पर स्वच्छता कि मांग को लेकर नारे लगाते यह स्कुली बच्चे हे जा कि टोंक जिले के ककराज गांव कि स्कुल मे पडाई करते हे पर स्कुल जानी कि इनकी राह बहुत मुश्किल हे,कारण स्कुल जाने वाले एकमात्र रास्ते पर भरा पानी ओर किचड ऐसे मे इन्हे शिक्षा ग्रहण करने पसी रास्ते पर होकर जाना होता हे क्या करे मजबुरी जो हे, इस मुसीबत से निजात को लेकर बच्चो ने गंाव के सरपंच से सडक बनाने किगुहार लगाई पर सुनवाई नही हुई ओर अपनी बात रखने को बच्चे पहुच गये जिले के मालिक जिला कलेक्टर के दर पर अबदेखना यह होगा किइनकी सुनवाई होती हे या नही,खुद सुनिये शिक्षा की कठीन डगर कि कहानी मासुमो कि जुबानी । 
 सरकारे भले ही विकास के बडे-बडे दावे करती हो पर स्कुल जाने वाले रास्ते पर भरे पानी ओर किचड से निजात के लिये टोंक मे कलेक्टर कार्यालय पर नारे लगाते बच्चो कि पीडा इनकी आवाज मे स्वतः ही अहसास कराती हे कि वाकई बच्चो कि शिक्षा कि डगर बहुत मुश्किल हे पर सवाल तब ओर हो जाते हे जबकि प्रशासन का कोई नुमाईन्दा धन्टो इनकी आवाज तक नही सुनता हे ओर ऐसे मुद्वे पर मीडीया से दुरी बना ली जाती हे।
 
ऐसा नही हे यह कहानी सिर्फ ककराज जैसे एक स्कुल कि हो बरसात के मोसम मे अधिकांश ग्रामीण स्कुलो किकुछ ऐसी ही कहानी हे पर सरकारे ग्रामीण विकास के बडे-बडे दावे तो करती हे पर स्कुल जाने तक कि मुश्किल राह को आसान बनाना उसके बस मे नजर नही आता हे ।
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