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 जैन संत तरुण सागर महाराज नही रहे

By on September 1, 2018 0 96 Views

 

 

अपने बेबाक प्रवचनों के लिए किए जाएंगे याद।

51 साल की उम्र में हुआ स्वर्गवास।

 

अपने बेबाक प्रवचनों कर लिए सदा याद किया जाएगा जैन संत तरुण सागर महाराज को आज उन्होंने दिल्ली कर शाहदरा के कृष्णानगर मे तड़के लगभग 3 बजकर 15 मिनट पर अंतिम सांस ली ओर राष्ट्र के नाम कई यादगार संदेश छोड़कर वह चले गए।

अपने कठोर प्रवचनों के लिए जाने जाने वाले जैन मुनि तरुण सागर आज खुद इस दुनिया को अलविदा कह गए उनका 51 साल की उम्र में निधन हो गया है. उन्होंने दिल्ली के शाहदरा के कृष्णानगर में आज सुबह 3 बजकर 18 मिनट पर अंतिम सांस ली. दरअसल उन्हें पीलिया हुआ था ओर बीमारी लंबी चलती गयी और जिसके बाद उन्हें दिल्ली के ही एक निजी अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था पर वह रिकवरी न कर सके और दुनिया को ओर अपने भक्तों को सदा नई राह दिखाने वाले संत दुनिया छोड़ गए डॉक्टरों के अनुसार उनपर दवाओं का असर होना बंद हो गया था ओर शरीर मे कोई रिकवरी न होने से उनकी सेहत लगातार बिगड़ती चली गयी इसी दौरान यह भीकहा जा रहा है कि जैन मुनि तरुण सागर जी ने इलाज कराने से भी इनकार कर दिया था और कृष्णानगर स्थित राधापुरी जैन मंदिर चातुर्मास स्थल पर जाने का निर्णय लिया. जैन मुनि तरुण सागर का अंतिम संस्कार आज दोपहर 3 बजे दिल्ली मेरठ हाइवे स्थित तरुणसागरम तीर्थ पर होगा ओर उनकी अंतिम यात्रा दिल्ली के राधेपुर से शुरू होकर 28 किमी दूर तरुणसागरम पर पहुंचेगी जिसमे हजारो भक्तो के पहुचने की सभावना है।

बेबाक बयानों को लेकर रहते थे चर्चा में

जैन मुनि तरुण सागर हमेशा ही बेबाक बोलते थे वह समाज और देश पर हमेशा अपने प्रवचनों में व्यवस्थाओं पर कठोर राय रखते थे और ज्वलंत विषयो पर कभी खामोश नही रहते थे वह चले गए है पर उनके बयान सदा उनके भक्त और दुनिया के कानों में गूंजते रहेंगे जैन मुनि हमेशा अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहै , जैन मुनि तरुण सागर महाराज ने देश की कई विधानसभाओं में भी प्रवचन दिया ओर हरियाणा विधानसभा में तो उनके प्रवचन पर काफी विवाद भी हुआ था, जिसके बाद संगीतकार विशाल डडलानी के एक ट्वीट ने काफी बवाल खड़ा कर दिया था पर मामला बढ़ता देख विशाल को माफी भी मांगनी पड़ गई थी. इस विवाद के बाद आम आदमी पार्टी से जुड़े संगीतकार डडलानी ने राजनीति से अपने आप को अलग कर लिया था ओर तरुण सागर महाराज ने भी उन्हें माफ कर दिया था।

जैन मुनि तरुण सागर का जन्‍म मध्य प्रदेश के दमोह में 26 जून, 1967 को हुआ था. उनकी मां का नाम शांतिबाई और पिता का नाम प्रताप चंद्र था. तरुण सागर ने आठ मार्च, 1981 को घर छोड़ दिया था. इसके बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ में दीक्षा ली,दिल्ली में अंतिम सांस ली और सबको छोड़ कर वह आज तड़के विदा हो गए पर समाज और देश को नई राह दिखाने ओर अपनी बेबाक राय रखने के लिए सदा उन्हें याद किया जाता रहेगा।

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