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जौधपुरियां मेले में उमड़ा जनसैलाब…

By on September 15, 2018 0 170 Views

देशभर से पहुंचे लाखों पदयात्री…

जयकारों के साथ भगवान देवनारायण को लगाया ढोक….

टोंक। टोंक जिले के जौधपुरिया में गुर्जर समाज के आराध्य देव भगवान देवनारायण के सालाना मेले में श्रद्धालुओं को जनसैलाब देखने को मिला। देषभर से गुर्जर समाज के लोग पदयात्राए करते हुए श्रद्धालू अपनी मनोकामना पुर्ति की आस लगाए जौधपुरिया धाम पहुंचे और लोकदेवता भगवान देवनारायण को ढोक लगाया। इस दौरान लक्खी पदयात्राओं लाखों पदयात्री देवजी के भजन जाते हुए कदम से कदम मिलाकर चलने नजर आए। गुर्जरो के आराध्यदेव भगवान देवनारायण के टोंक के जोधपुरिया मे स्थित प्राचीन मन्दिर की समाज के लोगो के साथ अन्य समाजो मे भी खूब मान्यता है, मन्दिर पर जंहा साल भर पदयात्राओ के आने को सिलसिला रहता है वही साल मे लगने वाले लक्खी मेले में देषभर से मे जिसमे लाखो यात्री जौधपुरिया पहुचते हैं,
जौधपुरिया गांव मे माषी डेम के किनारे स्थित इस प्राचिन मन्दिर को लेकर मान्यताओ ओर आस्था का भी बडा लम्बा-चौडा इतिहास रहा है, लोगो की मान्यता है कि जो भी यहा आकर क्षृद्धा से मांगता है भगवान देवनारायण उसकी सदा सुनते है। षनिवार को देषभर कई हिस्से से आई पदयात्राओं में आए श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण करवाने के लिए जौधपुरिया आए और देवनारायण बाबा की जयकारों के साथ भगवान देवनारायण को ढोक लगाया। खूद ही सुनिये भगवान देवनारायण के प्रति लोगो की आस्था मासी नदी के किनारे लगभग एक हजार साल पुराने प्राचिन मन्दिर के बारे मे प्रचलित है कि किसी को अचानक नदी मे ज्योती दिखाई दी और कहा गया कि इस स्थान पर भगवान देवनारायण के मन्दिर का निर्माण होगा और ऐसा ही हुआ तभी से इस प्राचिन मन्दिर पर लोगो की आस्था का सैलाब उमडता रहा है और साल मे दो बार यहा लक्खी मेले मे भरते है तो पुरे साल यहा आकर सवामणिया करने वालो का तांता लगा रहता है।
जौधपुरिया मन्दिर का अपना इतिहास है, वही आस्था का आलम यह है कि यहा भादवे की पंचमी की रात को भोपा द्वारा चांदनी रात मे नृत्य करते हुऐ चम्तकारी कमल के फुल का प्रकट होना अपने आप मे ही चम्तकार हे वही यहा पर सेकडो सालो ने निरन्तर जलती अखण्ड ज्योती ओर भण्डारे मे सालो से माजुद देषी घी के आखो पर लगाने से नेत्र ज्योती ठीक होने की भी लोगो मे मान्यता है।आज के कलयुग मे भी अपने चम्तकारो ओर भक्तो के सहारे पुजे जाने वाले लाकदेवताओ मे से एक भगवान देवनाराणण के राजस्थान मे प्रमुख मन्दिरो आसिन्द और जोधपुरिया मे से एक इस प्राचिन मन्दिर की छठा ही निराली है और गुर्जर समाज ही नही सभी समाजो की आस्था के इस केन्द्र पर साल भर चलने वाले आयोजनो के साथ ही यहा भादवे की पंचमी की रात को भोपा द्वारा चांदनी रात मे नृत्य करते हुऐ चम्तकारी कमल के फूल का प्रकट होना अपने आप मे ही चमत्कार है।
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