November 13, 2018
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कामधेनू सर्किल का लोकापर्ण…

By on October 4, 2018 0 48 Views
शहर के सौंदर्यकरण और गो-सरंक्षण को ध्यान में रखते हुए टोक नगर परिशद की ओर से बनाए गए कामधेनू सर्किल का आज रेवासा अग्र पीठाधीश्वर वेदांताचार्य स्वामी राघवाचार्य ने किया हैं। इस दौरान लोकापर्ण समारोह में राश्ट्रीय स्वयंसेवक के राजस्थान सेवा प्रमुख षिवलहरी ने गाय को मनुश्य की समृद्धि का प्रतीक बताते हुए कहा कि जहां पर गाय का वास होता हैं उस जगह पर वास्तुदोश नही रहता हैं। टोंक षहर से षहर से गुजर रहे राश्ट्रीय राजमार्ग 12 छावनी ओवर ब्रिज के पास बाहर से आने वाले लोगो को षहर के सौंदर्य की झलक दिखाने के साथ-साथ गो-सरंक्षण के लिए आमजन को प्रेरित करने के उद्देष्य से बनाए गए हैं कामधेनू सर्किल का लोकापर्ण आज समारोहपूर्वक हुआ।
जिसमें राश्ट्रीय स्वयंसेवक के राजस्थान सेवा प्रमुख षिवलहरी, स्थानीय सांसद एवं विधायक के अलावा भाजपा जिलाध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण लोग मौजूद रहे। सीकर स्थित रेवासा पीठ के अग्र पीठाधीश्वर वेदांताचार्य स्वामी राघवाचार्य ने की पट्टिका अनावरण कर कामधेनू सर्किल का लोकापर्ण किया हैं, वही दूसरी राघवाचार्य सहीत अन्य अतिथियों ने सर्किल में बनी मार्बल की कामधेनू गाय का भी अनावरण कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद सर्किल आमजन को समर्पित किया। वही लोकापर्ण समारोह में उन्होने गाय को पूजनीय बताते हुए नगर परिशद के प्रयास की सराहना की हैं। आरएसएस के राज्य सेवा प्रमुख षिवलहरी ने कहा कि जिस भी घर अथवा स्थान पर गाय निवास करती हैं वहां वास्तु दोश नही होता हैं, हिंदू धर्म के अनुसार गाय में देवी-देवताओं का वास होता हैं इसलिए उसका पूजन सभी देवताओं की पूजा के समान हैं।
उन्होने नगर परिशद की ओर से षहर के प्रवेष द्वार के पास कामधेनू सर्किल का निर्माण करवाने पर प्रषंसा करते हुए इसे गौ-सरंक्षण के लिऐ महत्वपूर्ण बताया। हम आपकों बता दे लगभग 35 लाख की लागत से षहर के छावनी ओवर ब्रिज के पास कामधेनू सर्किल का निर्माण करवाया गया हैं, जिससें मार्बल की बनी कामधेनू गाय की अपने अपने बछडे को दुध पिलाते हुए की प्रमिता हैं। वही लोकापर्ण के बाद से षहर के लोग खासकर युवां कामधेनू सहित अन्य गायों की प्रतिमाओं के साथ सेल्फी लेते दिखे। सभापति ने बताया कि षहर के मुख्य एंट्री के पास बनाए गए इस सर्किल को देख लोगो में गायों के सरंक्षण की भावना जागे इसका मुख्य उद्देष्य भी यही हैं। वही सर्किल का आकर्शक बनाने के लिए गायों की प्रतिमाओं के अलावा पेड-पौधे, झरने एवं लाइंटिंग लगाई गई, जिससे इसकी सुंदरता का आभास स्वतः ही हो जाता हैं। आज इसका लोकापर्ण कर आमजन को इसे सुपुर्द कर दिया गया हैं।
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