October 16, 2018
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खलील का घरेलू खेल मैदान है बदहाल।

By on September 18, 2018 0 848 Views

टोंक पवेलियन ग्राउंड पर खेलना हुआ मुश्किल।

मैदान पर लगा दिया गिट्टी मिक्सर प्लांट।

टोंक के जिस पवेलियन खेल मैदान से खेलकर टोंक का खलील अहमद भारतीय टीम में पहुचा वह मैदान अपने हालात पर आंसू बहाता नजर आ रहा है,मैदान का हाल गांव के किसी कच्चे रास्ते जैसा है तो दूर से यह खेत के समान दिखाई पड़ता है रही सही कसर सीवरेज प्रोजेक्ट के प्लांट ने पूरी कर दी है,जिसके चलते यंहा पर गिट्टी थ्रेसर संचालित है और खलील का खेल मैदान अपने हालात पर आंसू बहा रहा है जिसका उसके कोच सहित सभी खिलाड़ियों को मलाल है पर सुनने वाला कोई नजर नही आ रहा है।


गड्डो में तब्दील तो चारो ओर झाड़ियां ओर खेल मैदान पर गिट्टी मिक्सर प्लांट यह हाल है पवेलियन मैदान का उस खेल मैदान का जंहा खलील ने किर्केट खेली ओर आज भी खेलता है, यह वही खेल मैदान है जंहा से भारतीय एशिया टीम में शामिल लेफ्ट आर्म फ़ास्ट बॉलर ने किर्केट का पहला सबक सिखा ओर यंहा संचालित टोंक किर्केट एकेडमी में कोच इम्तियाज के सानिध्य में अपने किर्केट के सफर को अपनी मेहनत से छोटे से शहर से अन्तराष्ट्रीय किर्केट तक पहुचा दिया पर आज टोंक का यही किर्केट मैदान अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है तो यंहा खेलने वाले युवा किर्केटर को तमाम मुसीबतों से रूबरू होना पड़ता जैसे मानो वह गांव के किसी खेत मे किर्केट खेल रहे हो।

 खलील के कोच इम्तियाज अली ने क्या कहा

खलील के खेल को लेकर इम्तियाज कहते है कि खलील का एटीट्यूड उसे सबसे अलग करता है वह बहुत मेहनती है और भविष्य में वह भारत के लिए ज्यादा से ज्यादा किर्केट खेले यही मेरी चाहत है,वही खेल मैदान के हालात पर इम्तियाज की तकलीफ उनके चेहरे पर झलकती है कि टोंक में प्रतिभाओं की कोई कमी नही है पर आज हमारे पास एक खेल मैदान तक भी नही है और जो मैदान मौजूद है उसका हाल देखकर तकलीफ होती है,मैदान गड्डो में तब्दील है,झाड़ियां उगी है,एक हिस्से पर मिलीभगत से गिट्टी प्लांट चल रहा है पर सुनने वाला कोई नही है यह तकलीफ है भारत को अन्तराष्ट्रीय खिलाड़ी देने वाले खलील अहमद के कोच इम्तियाज अली की।

राजस्थान की एक मात्र नवाबी रियासत रही टोंक जैसे छोटे से शहर से खलील का सफर भी मुसीबतों से भरा रहा तो यंहा खेल मैदान के नाम पर टोंक के आखरी नवाब सआदत अली खां की ओर से बनाये गए 1941 में सआदत पवेलियन मैदान पर टोंक किर्केट एकेडमी में खेलकर खलील आगे बढ़ा पर आज मैदान के एक हिस्से पर रुडिफ के गिट्टी क्रेशर प्लांट का कब्जा है तो दूसरी ओर मैदान में गहरे गड्ढे है,चारो ओर जंगल उगा है,जंहा खिलाड़ी खुद को भी असुरक्षित महसूस करते है।

किर्केटर अयान कहते है कि खेल मैदान पर हालात बुरे है मैदान बरसात में ओर ज्यादा बिगड़ जाता है,जिसे भी हम ही सही करते है,हमे एक अच्छा खेल मैदान मिलना चाहिए न कि गड्डो ओर झाडियो वाला खेल मैदान। यही बात किर्केटर अनस खान कहते है कि हमारे खेल मैदान पर बहुत परेशानियां है जानवर टर्फ को खराब कर देते है,वही मैदान पर गड्ढे है तो झाड़ियों में गेंद जाने पर तकलीफ बढ़ती है।

सरकारें खेलो को आगे बढ़ाने की बड़ी बड़ी घोषणाएं तो करती है पर खेलो को आगे बढ़ाने के नाम पर उसकी हकीकत क्या है इसकी बानगी देखनी हो तो एक बार भारतीय किर्केटर खलील अहमद के उस होम ग्राउंड को जरूर देख आये जंहा से खलील ने अपना किर्केट का सफर शुरू किया और आज भी वह जब भी टोंक होता है इस मैदान पर जरूर नजर आता है,टोक कॉलेज के अधीन यह खेल मैदान उन हालातो में अपने हालात पर आंसू बहा रहा है जब कि केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ राजस्थान से है और इस खेल मैदान ने खलील अहमद जैसा खिलाड़ी देश को दिया है जिसमे आज हॉगकॉंग के खिलाफ अपने जीवन का अपना अन्तराष्ट्रीय मैच एशिया कप में खेलकर शुरुआत की है।

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