January 18, 2019
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लाल बत्ती वाला कोतवाल डोला रहा आकर्षण का केन्द्र…

By on September 20, 2018 0 92 Views

लाल बत्ती वाले कोतवाल डोले को देखने के लिए मेले में लोगो की उमडी भीड….

मेले में जगह-जगह पुलिस जाब्ता रहा तैनात….

टोंक। भले ही केन्द्र सरकार द्वारा देश-प्रदेश  मे सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के लिये लाल बत्ती लगाने पर पूर्ण पांबदी लगा दी गई हो लेकिन टोंक मे पीढियों से जलझूलनी एकादषी पर निकलने वाले काला बाबा कोतवाल के लाल बत्ती पहले ही अनूरूप ही दिखाई दी, आखिर कौन है कोतवाल बाबा जो अपने वाहन पर सरकारी आदेष के बावजूद लाल बत्ती लगाकर घूमता है। लाल बत्ती वाला कोतवाल…हम किसी थानाधिकारी पर अपने वाहन पर लाल बत्ती लगाने का आरोप नही लगा रहे है बल्कि टोंक मे जल झुलनी पर आयोजित होने वाली डोल यात्रा के बारे मे बात कर रहे जहां पर लाल बत्ती लगा डोला मेले आये श्रद्धालूओं को आर्षिवाद के साथ-साथ षहर के सभी मन्दिरों से आये कंट्रोल करता हुआ निकलता है दरअसल टोंक जिला मुख्यालय पर हर साल जलझूलनी एकादषी पर निकलने वाली डोल यात्रा मे पुरानी टोंक थाना इलाके के काला बाबा क्षेत्र से श्री कल्याण धणी का डोला है जिसे काला बाबा और कोतवाल के नाम से भी जाना जाता है,
सैंकडों सालों से यह डोला इसी प्रकार दौडता हुआ निकलता है, मंदिर से दौडता हुआ यह डोला प्रत्येक डोले से मिलता है इसलिए इसे कोतवाल कहा जाता है और इसे सब डोलों का संरक्षक भी कहा जाता है,दौड लगाने और भगदड मचाते हुये निकलने के बावजूद आजतक इसकी वजह से कोई हादसा नही हुआ है बल्कि इसे देखने आये लोग कोतवाल डोले का अपने पास आने राह देखते है ताकि कल्याण धणी का आर्षिवाद उन्हे मिले सके, दौडते हुऐ डोले को देखने के लिए दूर-दूर से आते हैं, भगवान की डोला यात्रा का आनन्द लेते हैं। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार जन्माश्ठमी के बाद भगवान श्रीकृश्ण को पहली बार स्नान करवाने के लिये उनकी माता यषोदा तालाब लेकर गई थी जहां श्रीकृश्ण की लीला से माता यषोदा ने ब्रहमांड के दर्षन किये थे, तभी से जन्माश्टमी के बाद जलझुलनी एकादषी पर्व पर भगवान श्रीकृश्ण को स्नान कराने परम्परा का निर्वहन किया जा रहा है और इससे जुडी है जलझुलनी एकादषी डोल यात्रा निकालने की प्रथा जहां देषभर मे लोगो हर मन्दिर से भगवान श्रीकृश्ण की प्रतिमा का नहलाने के लिये डोले मे सवार कर ले जाते है
जबकि टोंक षहर के सभी डोलों का सरंक्षण प्रदान करने का काम लाल बत्ती वाला डोला करता है। मान्यताऐं ओर परम्पराऐं अलग-अलग जगहों की अलग हो सकती है किन्तु आस्था सब जगह एक जैसी ही है, लेकिन लाल बत्ती लगाये टोंक मे दौड लगाता हुआ काला बाबा का डोला प्रदेष में अपने अनोखेपन के लिए अपनी अलग ही पहचान रखता है ओर यह परम्परा टोंक में प्राचीन काल से जारी है, जिसे देखने के लिये उमडने वाले जनसैलाब यह बताने के लिये काफी है धर्म प्रति लोगो को जुडाव कम नही हुआ है और लाल बत्ती वाले कोतवाल डोले को देखने वाली संख्या साल-दर-साल बढती जाती है।
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