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रंगीले राजस्थान का नागौर का किला

By on December 26, 2018 0 122 Views

रंग-रंगीला राजस्थान अपनी नायाब खूबसूरती व रजवाड़ी षान के प्रतीक किलों और महलों के कारण सदा से ही पर्यटकों के आकर्शण का प्रमुख केंद्र रहा है। आज हम राजस्थान के मध्य भाग में बसे एक ऐसे ही पर्यटनस्थल नागौर की सैर करते है तथा यह जानते हैं कि नागौर क्यों है पर्यटकों के फैली रेत के बीच एक प्रकाषस्तंभ की तरह दिखाई देता है। 4थी शताब्दी में अस्तित्व में आया यह किला राजस्थान के अन्य किलों की तरह ही ऊॅची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। नागौर की सुंदरता यहॅा के पुराने किलों व छतरियों में है, जिसका उत्कृश्ट उदाहरण हमें नागौर में प्रवेश करते हो देखने को मिलता है।

इस नगरी में प्रवेश करने के लिए तीन मुख्य द्वार है, जिनके नाम देहली द्वार, त्रिपोलिया द्वार तथा नाकाष द्वार है। नागौर व उसके आसपास के पर्यटनस्थलों में प्रमुख नागौर का किला, तारकिन की दरगाह, वीर अमर सिंह राठौड़ की छतरी, मीरा बाई की जन्मस्थली मेड़ता, खरंवसर किला, कुचामन किला आदि है। किले के भीतर भी छोटे-बड़े सुंदर महल व छतरियाॅ हैं, जो हमें राजस्थान के गौरवशाली इतिहास में खीच ले जाते हैं। किले कि भितर तीन सुंदर पैलेस हाडी रानी महल, शीश महल और बादल महल है, जो उअपने सुंदर भित्ति चित्रों के कारण प्रसिद्ध हैं। इनके समीप ही एक मस्जिद है, जिसे मुगल षासक अकबर ने बनवाया था। यहाॅ पर सूफी संत मोइनुदीन चिष्ती की एक दरगाह भी है।

इसी के साथ ही किले के भीतर राजपूताना षैली में बनी हुई सैनिकों की सुंदर छतरियाॅ भी है। नागौर का मुख्य आकर्शण कयाॅ का लड़ाई, ऊॅट की दौड़, कठपुतली का खेल राजस्थानी नृत्य आदि भी पर्यटकों के लिए आकर्शण को प्रमुख केंद्र होते है। इस मेले में खासतौर पर ऊॅट, भेड़ घोडे़ गाया आदि पशुओं का त्रय-वित्रय होता है। यूर्य के अस्त होने के साथ ही नागौर के इस पशु मेले में यहाॅ के पारंपरिक लोकनृत्य की गूॅज एक सुंदर समा बाॅध देती है। सदा से पर्यटकों के आकर्शण का केंद्र रहा राजस्थान वाकई में अपने भीतर किलों व महलों के रूप में नायब खूबसूरती को समेटे हुए है। एक बार आप भी रापूतों की इस धरती की सैर जरूर कीजिएगा।

नागौर है विभूतियों की भुमि

मारवाड़ का नागौर एक ऐसा क्षेत्र है, जो कई ऐसी विभुवियों की जन्मस्थली है, जिन्होंने पूरी दुनिया में मारवाड़ की माटी का नाम रोषन किया। डिंगल और पिंगल भाशा में कई ग्रंथों की रचना करने वाले प्रसिद्ध कवि बृंद का जन्म नागौर के मेड़ता में हुआ था। मेड़ता कृश्ण भक्त मीराबाई की भी जन्मस्थली है। अकबर

कैसे पहुॅचे नागौर

भारत की राजधानी नईदिल्ली व राजस्थान की राजधानी जयपुर से मेड़ता रोड़ के लिए कई बसे उपलब्ध है। मेड़ता रोड़ से नागौर की दूरी 82 किमी है जिसे आप बस टैक्सी से तय कर सकते है।

किस मौसम में जाए

वैेसे तो वर्शभर में कभी भी आप नागौर जा सकते हैं परंतु यहाॅ जाने का अनुकुल समय फरवरी से मई तथा अगस्त से नवंबर माह के बिच का समय है।

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