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सैन्य अधिकारियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने की जरूरत : विपिन रावत

By on January 16, 2019 0 63 Views

 

हाल ही में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के 135वें कोर्स की पासिंग आउट परेड के बाद सेना प्रमुख विपिन रावत ने कहा कि भविष्य में युद्धों में तकनीकी क्षमता अहम होगी और सैन्य अधिकारियों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने की जरूरत है। उन्होंने आर्टिफिशियल इन्टेलीजेंस को इस्तेमाल करने की जरूरत बताई, क्योंकि कृत्रिम मेघा शक्ति में कई गुणा इजाफा हो रहा है। और रक्षा बलों के संदर्भ में यह भविष्य का हथियार बनेगी। यदि हम कृत्रिम बुद्धिमता और बिग डेटा पर काम शुरू नहीं करते तो काफी देर हो जाएगी। लड़ाईयां क्या हथियारों और सेना की वजह से होती है? यह सवाल बार-बार उठाया जाता रहा है। सवाल यह भी है कि इन दोनों को खत्म कर भी दिया जाए तो क्या अमन-चैन कायम हो सकेगा? इसका उत्तर है कि ऐसा नहीं देख रहे हैं। ड्रोन से बम गिराये जा रहे हैं। भविष्य में विमानों के बीच डाॅगफाइट खत्म हो जाएगी। दूर बैठे पायलट विमानों का संचालन करेंगे। गोला-बारूद की जगह लेजर और इलेक्ट्रो मैग्नेटिव पल्स का इस्तेमाल बढ़ेगा। हाथ में बंदूक थामे वर्दीधारी सैनिकों की जगह धीरे-धीरे मशीनी मानव यानी रोबोट ले लेंगे, जो पूरी तरह अपने कमांडर से निर्देश लेते होंगे और जिनके माथे, सीने और पीठ पर लगे कैमरे मुख्यालय को युद्ध की लाइव तस्वीरें दिखाते रहेंगे। इस दौरान सेना का रोबोटीकरण हो जाएगा। भविष्य के युद्ध नेटवर्क सैंड्रिक होंगे। यानी सैनिक पूरी तरह साइबर स्पेस से जुड़े होंगे। इजरायली रक्षा विभाग और अमेरिकी स्पेशल आॅपरेशन कमांड ने तो ऐसी ड्रेस तैयार कर ली है कि जो कि भी इस ड्रेस पहने सैनिक के सामने आएगा, उसकी हर गतिविधि को रिकाॅर्ड कर लिया जाएगा। ऐसे उपकरण भी तैयार कर लिए गए हैं कि कोई भी देश किसी भी दूसरे देश की कंप्यूटर प्रणाली को ठप्प कर सकता है। भारत का विरोधी देश चीन आर्टिफिशियल इन्टेलीजेंस पर काफी धन खर्च कर रहा है। सैन्य मामलों में वह हमसे कही आगे है। सैन्य मामलों में अगली क्रांति प्रौद्योगिकी के उपयोग के जरिये आधुनिक बनाया जाए। भारत की सेनाएं आधुनिक होंगी तो देश की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी कुल मिलाकर आज आर्टिफिशियल इन्टेलीजेंस की मदद से स्वचालित शक्तिशाली हथियार बनाये जा रहे हैं या फिर ऐसे उपकरण जिनके सहारे कुछ लोग एक बड़ी आबादी का शोषण कर सकते हैं। भविष्य में लड़ जाने वाले युद्धों का स्वरूप ही बदल जाएगा। वे मैदानों में नहीं लड़े जाएगें।

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