January 18, 2019
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2019 में महागठबंधन की तैयारी में विपक्ष ।

By on December 13, 2018 0 30 Views

 

पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव परिणामों ने कांग्रेस को एक नयी ऊर्जा दे दी है। अब कांग्रेस और देशभर की विभिन्न्ा क्षेत्रीय पार्टियों के गठबन्धन को संगठित होने का एक सकारात्मक परिवेश इन चुनावों ने दिया है। सोमवार को राजधानी में आयोजित अपनी बैठक में कांग्रेस एवं विपक्षी दलो ने संदेश दिया है कि वे 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ मिलकर लड़ने के लिए तैयार हैं। विपक्षी पार्टियों की इस एकजुटता को अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने की ज६ोजहद के रूप में भी देखा जा सकता है, पहली बाद देश में गैर-भाजपा की अवधारणा जोर पकड़ रही है।

1967 के आम चुनावों से पहले समाजवादी नेता डा.राम मनोहर लोहिया ने ‘कांग्रेस हराओ-देश बचाओ’ की हुंकार भरी थी और इसके लिए उन्होंने गैर-कांग्रेसवाद के साये के तले सभी शेष राजनीतिक दलों को लाने का सफल प्रयास किया था। नरेन्द्र मोदी एवं भाजपा को हटाने के लिये गैर भाजपावाद लाने के लिये वर्ष 2019 के चुनावों से पूर्व ऐसा ही वातावरण बनाया जा रहा है। लोगों में यह विश्वास जगाया जा रहा है कि भाजपा के विरोध में जितने भी दल हैं वे भी जनता के वोट की ताकत से सत्ता में आ सकते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में विपक्षी महागठबंधन को सफल बनाने के लिये प्रयास किये जा रहे है। एक समय जिस तरह देश में गैर-कांग्रेसवाद का जोर दिखता था, उसी तरह अब गैर-बीजेपीवाद का खाका गढ़ा जा रहा है। विरोधी विचारों वाले भी इस विपक्षी महागठबंधन का हिस्सा बनन को तैयार दिखाई दे रहे है। लेकिन बिना नीति एवं नियमों के यह महागठबंधन कैसे सफल होग? साल 2019 के लोकसभा चुनाव के म६ेनजर विपक्षी एकता की सफलता के लिये जरूरी है कि सशक्त राष्ट्र निर्माण के एजेंडे के साथ-साथ विपक्षी दलों की नीतियों की प्रभावी प्रस्तुती जरूरी होगी। दलों के दलदल वाले देश में दर्जनभर से भी ज्यादा विपक्षी दलो के पास कोई ठोस एवं बुनियादी मु६ा नहीं हैं, देश को बनाने का संकल्प नहीं है, उनके बीच आपस में ही स्वीकार्य नेतृत्व का अभाव है जो विपक्षी महागठबंधन की विडम्बना एवं विसंगतियों को ही उजागर करता है। विपक्षी गठबंधन को सफल बनाने के लिये नारा दिया गया है कि ‘पहले मोदी को मात, फिर पीएम पर बात’ । निश्चत ही इस बात पर विपक्ष एक हो जायेगा, लेकिन विचारणीय बात है और कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में अब नेतृत्व के बजाय नीतियां प्रमुख मु६ा होनी चाहिए, ऐसा होने से ही विपक्षी एकता की सार्थकता है और तभी वे वास्तविक रूप में भाजपा को मात देने में सक्षम होंगे। तभी 2019 का चुनाव भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है और इसके संकेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से मिल भी गये हैं। निश्चित तौर पर भाजपा को लेकर मतदाताओं का मानस बदला है, जो भाजपा की असली चुनौती है।

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