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आर्थिक प्रहारों से होगा पाक परस्त

By on February 26, 2019 0 45 Views

 

 

पुलवामा हमले के बाद देश के हरेक कोने से पाकिस्तान को सबक सिखाने की मांग उठ रही है। कुछ लोग तो पाकिस्तान के खिलाफ सीधी जंग छेड़ने की मांग कर रहे हैं। जाहिर है, लोगों का आक्रोश उबाल पर है और अब वे आतंकवाद को पाल-पोस रहे पाकिस्तान के प्रति किसी तरह कि रहम के मूड में नहीं है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि हमारी सेना व सुरक्षा बल माकूल वक्त पर तगड़ा प्रहार करेंगे ही, लेकिन फिलहाल अन्य रणनीतिक उपायों से भी पाकिस्तान को परस्त किया जा सकता है। मोदी सरकार इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ा भी रही है। इन रणनीतिक उपायों में आर्थिक उपाय भी शामिल हैं। विशेषज्ञों की राय है कि भारत पाकिस्तान की आर्थिक और कारोबारी घेराबंदी कर उसे तगड़ा झटका दे सकता है। मोदी सरकार ने इस दिशा में पहल करते हुए पहला काम यही किया कि पाकिस्तान से सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन) का दर्जा छीन लिया। इससे पाकिस्तान को भारत के साथ आपसी कारोबार में जो रियायतें मिलती थी, वे अब खत्म हो जाएंगी और इससे उसकी आर्थिक मुश्किलें बढ़ सकती है।

गौरतलब है कि विश्व व्यापार संगठन और इंटरनेशनल ट्रेड नियमों के आधार पर आपसी कारोबार में एमएफएन का दर्जा दिया जाता है। एमएफएन का दर्जा दिए जाने पर देश इस बात को लेकर आश्वस्त रहतें हैं कि उनके द्वारा आयात किए जाने पर उन्हें आयात संबंधी विशेष रियायतें प्राप्त होंगी। साथ ही उन्हें व्यापार में नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। भारत ने पाकिस्तान को वर्ष 1996 में एमएफएन का दर्जा दिया था। पाकिस्तान को जब यह दर्जा मिला तो इसके साथ ही पाकिस्तान को अधिक आयात कोटा देने के साथ उत्पादों को कम ट्रेड टैरिफ पर बेचे जाने की छूट मिली। यद्यपि 23 साल पहले भारत की ओर से पाक को दिया गया यह दर्जा एकतरफा ही था। पाकिस्तान ने भारत को यह दर्जा नहीं दिया। पाकिस्तान को एमएफएन का दर्जा देने के बाद भी भारत के साथ उसका आपसी कारोबार नहीं बढ़ा।

भारत के आर्थिक प्रहार से पाकिस्तान को जोरदार सबक सिखाया जा सकता है। इस समय पाकिस्तान भारी आर्थिक दिवालिया जैसी स्थिती में है। दिसंबर 2017 से अब तक पाकिस्तान रूपए का चार बार अवमूल्यन कर चुका है। नकारात्मक छवि की वजह से पाकिस्तान में विदेशी निवेश लगातार घटता जा रहा है। जबकि दूसरी ओर भारत पाकिस्तान की की तुलना में मजबूत आर्थिक स्थिती मे है। भारत में विरेशी निवेश बढ़ रहा है। इस समय जहां भारत के विदेशी मुद्रा कोष में 400 अरब डाॅलर संचित है, वहीं पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा कोष महज 17 अरब डाॅलर का है। इतना ही नहीं, जहां पाकिस्ता की विकास दर 4 फीसदी है, वहीं पाकिस्तान से दोगुना 8 फीसदी विकास दर के साथ भारत दुनिया का सबसे तेजी से विकसित होता देश है और भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की छठवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है।

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