January 17, 2019
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अशोक गहलोत का राजनीतिक सफर ।

By on December 19, 2018 0 44 Views

 

अशोक गहलोत ने तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। गहलोत ने मुख्यमंत्री एवं उनके सहयोग सचिन पायलट ने उप मुख्यमंत्री के रूप में जयपुर के अल्बर्ट हाॅल में शपथ ली। गहलोत 1998 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और 2008 में दूसरी बार मुख्यमंत्री का पदभर संभाला। उन्होंने इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी तथा पी.वी. नरसिम्हा राव के मंत्रिमण्डल में केन्द्रीय मंत्री के रूप में कार्य किया। वे तीन बार केन्द्रीय मंत्री बने। भाजपा के कांग्रेस मुक्त भारत के नारे के बीच कांग्रेस की दिनोदिन जनमत पर ढ़ीली होती पकड़ एवं पार्टी के भीतर भी निराशा के कोहरे को हटाने के लिए गहलोत के जादूई व्यक्तित्व ने अहम भूमिका निभाई है और उसी का परिणाम राजस्थान में कांग्रेस की जीत है। देश में राजनीतिक सोच में बड़े परिवर्तनों की आवश्यकता है। एक सशक्त लोकतंत्र के लिये भी यह जरूरी है। परिवर्तन के बारे में एक आश्चर्यजनक तथ्य है कि यह संक्रामक होता है। जिससे कोई भी पूर्ण रूप से भिज्ञ नहीं है, न पार्टी के भीतर के लोग और न ही आमजनता। हालांकि यह मौन चलता है, पर हर सीमा को पार कर मनुष्यों के दिमागों में घुस जाता है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के पुराने और अनुभवी नेता अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी के भीतर ऐसी ही परिवर्तन की बड़ी प्रतिध्वनि की है, जिसके दूरगामी परिणाम पार्टी को नया जीवन एवं नई ऊर्जा देंगे। जिसने न सिर्फ कांग्रेस पार्टी के वातावरण की फिजां को बदला है, अपितु राहुल गांधी के प्रति आज जनता के चिन्तन के फलसफे को भी बदल दिया है। रूको, झांको और बदलो- राहुल गांधी की इस नई सोच ने पार्टी के भीतर एक नये परिवेश को एवं एक नये उत्साह को प्रतिष्ठित किया है।

तड़क-भड़क से दूर मगर राजनीतिक समर्थकों की फौज से घिरे रहने वाले अशोक गहलोत के बारे में कहा जाता है कि वह 24 घंटे अपने कार्यकर्ताओं के लिए उपलब्ध रहते हैं। वे सरल एवं सादगी पसंद भी है। मौलिक सोच एवं राजनीतिक जिजीविषा के शिखर पुरूष गहलोत का जन्म 3 मई 1951 हो राजस्थान के जोधपुर में मशहूर जादूगर लक्ष्मण सिंह गहलोत के घर हुआ। वे राजनीति मे कई दफा राजनीतिक जादू दिखाते रहे। उनकी जादुई चालों की ही देन है कि आज वह तीसरी बार राजस्थान के मुख्यमंत्री बने हैं। अशोक गहलोत पार्टी के क६ावर नेता है। पिछले दिनों उन्होंने गुजरात प्रभारी के रूप में गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी के मुख्य रणनीतिकार की भूमिका प्रभवी ढंग से निभाई। जिससे भाजपा के पसीने छूट गये थे। उससे पहले उन्हांेने पंजाब चुनाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जहां कांग्रेस को जीत हासिल हुई। अब मुख्यमंत्री की नई जिम्मेदारी ने साफ कर दिया है कि पुराने दौर के उन कुछेक चेहरों में शामिल हैं जिन्हें नए नेतृत्व का पूरा भरोसा हासिल है। गहलोत की नयी पारी एवं जिम्मेदारी के भी सुखद परिणाम आये तो कोई आश्चर्य नहीं है। राष्ट्रीय महासचिव बनाये जाने पर उन्होंने अपने एक बयान में कहा था कि राजस्थान से उन्हें बहुत प्यार मिला है। इस कारण वे राजस्थान से दूर होने की बात सोच भी नहीं सकते। गहलोत की पिछली दो बार की पारी भी प्रदेश को सुकून देने वाली ऐतिहासिक पारी रही है, वैसे ही यह तीसरी पारी भी विकास के नये कीर्तिमान गढ़ने वाली साबित होगी इसमें कोई संदेह नहीं है। अशोक गहलोत पार्टी के सीनियर लीडर है, उनके पास 36 साल का राजनीतिक ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय, सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक अनुभव है। वे एक उर्जावान, युवाओं को प्रेरित करने वाले, कुशल नेतृत्व देने वाले और कुशल प्रशासक के रूप में प्रदेश कांग्रेस के जननायक हैं, निश्चित ही उनकी नयी पारी प्रदेश को विकास की नयी गती देगी।

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