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चुनावी प्रचार की तरह प्याजो के दामों में भी तेजी

By on October 25, 2018 0 76 Views

वर्ष 1998 की तरह इस बार भी चुनाव के मौसम के दौरान प्याजों ने सरकार की चिंता बड़ा दी है। चुनावी वर्ष में प्याज अपने तीखे तेवर दिखा रहा है। जहां उसके दाम आसमान छूते नजर आ रहे है। अब कुछ राज्यों में विधानसभा चुनाव और अगले वर्ष के मध्य में आम चुनाव में प्याज एक बार फिर बड़ा चुनावी मुद्दा बनने जा रहा है। 1998 में प्याज के भाव में आई तेजी राजस्थान और दिल्ली में विपक्ष का एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना था और दोनों स्थान पर भाजपा को सत्ता गंवानी पड़ गई थी। अब एक बार फिर चुनाव से पहले प्याज के दाम में तड़का लग चुका है। कुछ घरों को छोड़ देश के लगभग सभी घरों की रसोई में प्याज रोजाना काम में लिया जाता है। देश में प्याज के कुल उत्पादन का 55 फीसदी तीन राज्यों महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्यप्रदेश से आता है। इसके अलावा राजस्थान प्याज का बहुत बड़ा उत्पादक राज्य है। प्याज की तीन सीजन है अप्रेल से अगस्त, अक्टूबर से दिसम्बर और जनवरी से मार्च। इन तीन सीजन में प्याज के उत्पादन में कमी या वृद्धि के आधार पर प्याज के दाम तय होते है। इस हालात में वर्तमान सरकार के लिए ये चुनौती का विषय है कि किस प्रकार से प्याजों के दामों को नियंत्रण में रखा जाए तथा वर्तमान सरकार को वर्ष 1998 के चुनावों को भी ध्यान में रखना चाहिए कि जहां प्याज के दाम एक बड़ा चुनावी मु६ा बना था ओर दिल्ली तथा राजसथान में सत्ता में बड़ा उलटफेर हुआ था।
देश में लगभग अधिकांश प्याज जनवरी से मार्च के सीजन में होता है। राजस्थान के जोधपुर व जैसलमेर में बड़े पैमाने पर प्याज की खेती होती है। गत तीन वर्षो में किसानों को नुकसान उठाकर सस्ते दाम में अपना प्याज बेचना पड़ा। कई जगह पर तो उन्हें खरीदार तक नहीं मिले। गत वर्ष मारवाड़ में किसानों ने अपना पूरा प्याज डेढ़ से तीन रुपए प्रति किलोग्राम तक बेचा। भाव नहीं मिलने से किसानों की प्याज के प्रति रूचि कम हो गई। यही कारण है कि इस वर्ष उत्पादन काफी कम हुआ। इससे प्याजों के दामों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यही नहीं सूचना के मुताबिक किसानों का कहना हे कि दाम अभी और बढ़ेंगे। और यह तेजी लम्बी चलेगी। उन्होंने बताया कि चार वर्ष पूर्व निर्यात पर सरकार की लगाई गई रोक के कारण हमारे कई विदेशी ग्राहक टूट गए। इस कारण निर्यात घटने से देश में स्टॉक बढ़ा और दाम काबू में रहे, लेकिन इससे किसान को हमेशा घाटा हुआ। साल दर साल प्याज की उपज के सही दाम नहीं मिलने के कारण किसान का इससे मोह भंग हो चुका है। अब यदि सरकार किसानों को गारंटी प्रदान करे कि उनकी उपज के पर्याप्त दाम प्रदान किए जाएंगे तो ही किसान इस तरफ आकर्षित होंगे। अन्यथा यह संकट बरकरार रहेगा।

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