January 19, 2019
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पुष्कर ब्रह्मा मंदिर में चढ़ावे के फूल फिर से बाजार में..?

By on January 3, 2019 0 29 Views

भगवान के दर पर भी चलता खेल..?

संसार को बनाने वाले जगतपिता ब्रह्मा मंदिर के विश्व मे एकमात्र मंदिर में रोजाना देश और दुनिया से हजारो श्रदालु आस्था का दामन थामकर आते है । अपनी श्रद्धा के फूल ब्रह्मा जी के चरणों मे अर्पित कर मनोकामना मांगते है ।जो फूल जगतपिता को अर्पित किए जाते है उनका आखिर क्या होता है ।
 जब इस मामले की तह में जाकर छानबीन की गई तो पता चला कि आस्था के इन फूलों से मंदिर में तैनात कई लोगो की जेब गर्म होती है ।हैरानी की बात यह है कि आस्था के साथ यह पूरा गड़बड़झाला प्रबन्ध समिति के पहरे में हो रहा है ।यह भी आशँका है कि प्रबन्ध समिति की और से तैनात लोगो की शह पर ही सबकुछ हो रहा है। यह वही अस्थाई प्रबन्ध समिति है जिसे पूर्व महंत दिवंगत सोमपुरी के आकस्मिक निधन के बाद महंत कि गद्दी को लेकर उपजे विवाद के बाद राज्य सरकार की और से व्यवस्थाओ के लिए गठित की गई थी ।जगतपिता ब्रह्मा मंदिर के दर्शन के लिए आने वाले श्रदालु जो भगवान के दरबार मे पुष्प अर्पित करते है वे या तो पैसे लेकर फिर से दुकानदारों के पास भिजवा दिए जाते है या फिर चुपचाप फूल की गाठे पिछले वाले रास्ते से ग्रामीण अंचल में भेज दी जाती है ।यहा आस्था के यह फूल  गुलकंद और गुलाबजल बनाने वाली फेक्ट्रियो में फिर से नीलाम हो जाते है और मुनाफे का बड़ा हिस्सा मंदिर में तैनात लोगो को मिल जाता है । राज्य सरकार की और से मंदिर की व्यवस्थाओ के लिए गठित अस्थाई प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर है ।इसके अलावा उपखंड अधिकारी,तहसीलदार और अधिशासी अधिकारी भी इसके सदस्य है ।इन समिति में शामिल सभी सदस्यों के पास बड़ी जिम्मेदारी है ऐसे में मंदिर की व्यवस्थाए  पटवारी के हवाले ही है जिससे मंदिर की व्यवस्थाये जगतपिता के भरोसे ही है । इस मामले में उपखण्ड अधिकारी और समिति के सदस्य हरीश लंबोरा से बात करनी चाही लेकिन बाहर होने के कारण उनसे बात नही हो सकी । वही मंदिर में तैनात पटवारी प्रवीण वैष्णव ने बताया कि परंपरा के अनुसार कुछ लोग चढ़ावे के फूलो को ले जाते है हालांकि वे यह नही बता सके कि किसे यह फूल दिए जाते है और क्यो दिए जाते है ।मुफ्त में फूल देने की परमपरा किसने बनाई ।साफ है कि मंदिर में सब कुछ ठीक नही चल रहा ।
हालांकि मंदिर से जुड़े लोग इस बात को नकारते हुए यही कहते है कि मंदिर में सब कुछ ठीक चल रहा है और किसी भी कार्य मे कोई अनियमितता नही है
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