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चुनावी मुद्दा टोंक में रेल परियोजना

By on November 30, 2018 0 152 Views

70 साल पुरानी मांग लेकिन समाधान आज तक नही

 

टोंक -राजस्थान का लखनऊ कहलाने वाले नवाबी षहर टोंक के वासिंदों की प्रमुख मांगों मे से एक हैं जिला मुख्यालय से रेल जोडी जाए। यही कारण है कि चुनाव के समय हर बार राजनैतिक पार्टियां इसे भुनाने की कौषिष करती हैं लेकिन सरकार का कार्यकाल खत्म होते ही टोंक वासियों की उम्मीदों पर पानी फिर जाता हैं। एक बार फिर रेल की चर्चाए जौरों पर हैं क्योकि कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोशणा पत्र में यह जोडकर टोंक वासियों की उम्मीदें बढ़ाई कि अगर कांग्रेस सरकार बनाती हैं रेल की अधूरी पड़ी परियोजना को आगे बढ़ाएंगे। गौरतलब होगा कि 2016 में केंद्र सरकार ने अजमेर-नसीराबाद-टोंक-सवाई माधोपुर के लिए 873 करोड का बजट स्वीकृत किया था। लेकिन राज्य सरकार द्वारा ध्यान नही देने के कारण रेल परियोजना आगे नही बढ़ पाई और वर्तमान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मुद्दा मिलने के साथ ही अपना घोशणा पत्र के लिए एक ओर वादा मिल गया। यही कारण कांग्रेस रोजगार, किसान, चिकित्सा आदि के मुद्दो के साथ टोंक की रेल परियोजना को भी घोशणा-पत्र में जगह दी हैं।

 

आजादी के 70 साल बाद भी हाथ खाली

जिला मुख्यालय को रेलसेवा से जोडे जाने की मांग नवाबी रियासतकाल में षुरू हुई थी कि लेकिन आजादी के 70 बाद बीतने के बावजूद यह पूरी नही हो पाने से यहां की जनता खूद को ठगा सा महसूस करती हैं। क्योंकि चुनाव में हर बार टोंक में रेल लाने की बात कहकर राजनैतिक नुमाइंदें चुनाव लड़ते हैं और हर बार लोकसभा क्षेत्र मे चुनाव परिणाम के हर बार जनप्रतिनिधि बदलने के बावजूद ना तो टोंक रेलसेवा से जुड पाया और नाही यहां के लोगो का संघर्श खत्म हुआ, स्थानीय लोगो की माने तो पिछडा क्षेत्र होने के बावजूद यहां पहले औद्योगिकी की कमी है ऐसे मे रेल सेवा ना जुड पाना टोंक के विकास मे बाधा बना हुआ, क्योंकि औद्योगिकी की पूरी संभावनाओं के बावजूद यहां बेरोजगारी के कारण अधिकतर लोग रोजगार के लिये षहर या राज्य से बाहर जाने को मजबूर है।

बजट पास होने के बाद श्रेय होने की होड़

बता दे रेल को मुद्दा बनाकर चुनाव लडने वाले नेता चुनाव जीतने के बाद टोंक की इस मांग को पुरूजौर तरीके से संसद मे उठाने मे नाकामयाब रहे है, लेकिन इस बार टोंक-सवाईमाधोपुर क्षेत्र चुनाव जीतकर संसद पहुंचे सुखबीर सिंह जौनापुरिया ने टोंक की रेलसेवा की मांग संसद मे उठाने के साथ बजट देने की मांग की थी, फलस्वरूप केन्द्र सरकार के दूसरे रेल बजट मे टोंक के लिये रेल की घोषणा नही होने पर निराष लोगो को उसी दिन शाम को उत्तर-पश्चिम रेलवे महाप्रबंधक द्वारा प्रेस कांफे्रंस कर कहा गया था इस बार टोंक भी जुड़ जाएगा रेल लाइन से उन्होनें अजमेर-नसीराबाद-टोंक-सवाई माधोपुर के लिए होगी नई लाइन 873 करोड़ रूपये हुए स्वीकृत करने के बाद सांसद का ऐतिहासिक स्वागत व सम्मान हुआ था। वही दूसरी पूर्व सांसद रहे नमोनारायण यह कहते नजर आए कि यह उनकी ही बदौलत हैं। जबकि टोंक विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याषी सचिन पायलट भी इसे उनके कार्यकाल में स्वीकृत योजना बताते हैं।

राज्य सरकार की भागीदारी नही

रेल के लिये आंदोलन, संघर्श से लेकर बजट स्वीकृति का जष्न देख चूकी टोंक की जनता ने अगर कुछ नही देखा और सूना तो वह टोंक मे रेल की इंजन की आवाज। स्थानीय सांसद रेलमंत्री से बजट पास करवाने के बावजूद अब तक षिलान्यास नही करवाने का प्रमुख कारण है यही रहा कि राज्य सरकार ने इस मामलें भागीदार नही बनना चाहता। इसकी बानगी गौरवयात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के भाशण में दिखी और मुख्यमंत्री को सुनने आए जनसमुह में से जब रेल की मांग उठी तो उन्होने साफ षब्दों इससे किनारा करते हुए कह दिया कि यह केंद्र सरकार का काम हैं। जबकि ठीक पांच पहले 2013 मंे परिवर्तन यात्रा के दौरान रेल परियोजना के लिए उन्होने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर दोशारोपण किया है।

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