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मजहब नही सिखाता आपस मे बैर रखना………

By on August 18, 2018 0 137 Views

 

हिन्दु मन्दिर की सुन्दरता निखारते मुस्लिम कलाकार।

जयपुर का मोती डुंगरी मन्दिर का निखरेगा ओर स्वरूप।

किसी शायर ने सच ही लिखा हे परिन्दो मे होती नही फिरका परस्ती कभी मन्दिर पर जा बेठे, कभी मस्जिद पर जा बैठे पर आज यह बात उन कलाकारो पर बिल्कुल सटीक बेठती हे जो कि जयपुर के मोती डूंगरी के गणेश मंदिर मे चांदी की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने का काम कर रहे है ओर जानकार हेरानगी होगी कि यह सभी पांचो कलाकार कारीगर मुस्लिम हैं,पर इनके लिये हिन्दु-मुस्लिम,मन्दिर-मस्जिद सब बाते बेमानी हे इन्हे तो बस परवाह हे पैट कि ओर अपनी कला कि ऐसे मे सोर्हाद का इससे अनुपम उदाहरण क्या होगा कि मन्दिर का स्वरूप निखारते कलाकर मुस्लिम है जो कि दिन रात किये हे चांदी की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने का काम करने मे।
जयपुर के मोती डुंगरी मन्दिर के गणेश जी के प्रति लोगो कि अपार आस्था हे ओर बुधवार सहीत हर दिन यहा पर लोगो कि आस्था का सैलाब उमडता हे तो लोग यहा आकर मन्नते मांगते हे,जयपुर मे होने वाली लगभग हर हिन्दु शादी का पहला कार्ड मोती डुंगरी मन्दिर के गणेश जी के चरणो मे चडता हे ओर पहला निमन्त्रण गणेश को ही दिया जाता हे

 

इन दिनो मन्दिर का आन्तरिक स्वरूप ओर निखारने को मन्दिर कि आन्तिरिक दिवारो पर चायनीज प्लेटो के जरीये सोने को चडाने का कार्य प्रगती पर हे ओर पर कार्य को करते कलाकारो के मन मे कभी आता भी नही हे कि क्या मन्दिर क्या मस्जिद बस यह तो सिर्फ इतना जानते हे कि उनकी कला कि बन्धन कि मोहताज नही हे ओर मन्दिर का पुजारी भी इन कलाकारो से इतना स्नेह रखता हे अब यह परिवार का हिस्सा नजर आते है, दिवारो पर सोने की परत चढ़ाते हैं यह कलाकार ओर इसके लिये इन्हे मन्दिर कि ओर से दिया जाताा हे यह कलाकार उसे चाइनीज प्लेटों के जरिए परत में बदलते हैं, फिर केमिकल और हीटिंग की मदद से दीवारों पर लगाते हैं,जिसके बाद दिवारो का स्वरूप निखरा नजर आतो हे ओर चांदी कि दिवारो पर इ सकार्य कि 20 से 25 साल तक मोनी जाती है पर इसकी देखभाल के लिये प्रतिवर्ष इसकी दिवारो को सफाई होने से काम कि खुबसुरती बनी रहती हे ,मन्दिर सुत्रो के अनुसार इसके कार्य मे लगभग एक से ढेड किलो सोने के लगने का अनुमान हे

 

दुनिया का हर धर्म सिर्फ इन्सानियत ओर मानवता का पाठ पडाता हे ओर प्रेम का सन्देश देता हे ऐसे मे किसी कलाकार को परखना हो ता उसकी कला को देखीये मजहब को नही क्यो कि एक कलाकरा सिर्फ अपनी कला को जीता हे।मोती डूंगरी के गणेश मंदिर मे चांदी की दीवारों पर सोने की परत चढ़ाने का काम  पिछले 15 सालो से चल रहा हे ओर काम करने वाले कलाकार मुस्लिम कारीगर ही रहे हैं जो कि अपनी कला मे पारन्गत है ओर मन्दिर प्रशासन कि नजर में कोई भेदभाव नहीं होता है।वर्तमान समय मे भले ही इन्सान ओर इन्सान के बीच कटुता का वातावरण नजर आतो हो पर आज भी सोर्हाद की हर कदम पर मिशाले नजर आती हे जरूरत हे हम धर्म किराह पर चलकर प्रेम भाई चारे का नया हिन्दुस्तान बनाये ।

 

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