November 13, 2018
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खलील क्लब में पसरा सन्नाटा

By on October 31, 2018 0 94 Views

बदहाली का शिकार हुआ रियासतकालीन क्लब

 

टोंक रियासत के पांचवेें नवाब सआदत अली खां द्वारा रियासतकाल में खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए स्थापित खलील क्लब अब दुर्दशा का शिकार हो चला है। हाल यह है कि इस क्लब की मुख्य बिल्डिंग में अब सन्नाटा छाया रहता है और टेनिस के अलावां यहां कोई दूसरा खेल चालू नही है। इसे टोंक शहर का दुर्भाग्य कहा जाए और प्रशासनिक उदासीनता रियासतकाल में निर्मित कई ऐतिहासिक ऐसी इमारतों या संपत्ति जो नागरिकों को सुख सुविधाएं देने के उद्देश्य से निमित्त कराई गई थी। आज बदहाली का शिकार हो अपनी अंतिम सासें ले रही है। जहां तक खलील क्लब का प्रश्न है। कुछ वर्ष पहले तक तो जब तक मुख्य भवन के हालात सही थें। यहां हर शाम रौनक हुआ करती थी। बिल्डिंग की टेबल पर टक टक की आवाज और गुड शाॅट जैसी आवाजे वातावरण में उत्साह का माहौल पैदा करती थी। प्रशासनिक अधिकारी आईएस व आईपीएस, आरएएस से लेकर शहर के गणमान्य नागरिक इस खलील क्लब में आकर खेलों का आनंद लिया करते थे, लेकिन किसी ने भी इस क्लब में सुविधाओं के विकास के लिए कभी कोई प्रयास नहीं किया। सभी यहां आते रहे जाते रहे व मौजूद सुविधाओं का आनंद लेते रहे। कभी अपनी नायाब आबनुस की बनी बिल्डिंग की टेबल, नावों वाले भुल भुलैया वाल खेल, स्वीमिंग पूल, टेबल टेनिस, व टेनिस के लिए मशहूर रहा है। यह खलील क्लब के अधिक बुरे दिनों की शुरूआत तब और बढ़ी, जब कुछ वर्षों पूर्व इस खलील क्लब का नाम बदलकर खलील खेलकूद व सांस्कृतिक समिति कर दिया गया। आज हालात यह है कि अपनी 33 बीघा जमीन में से सात बीघा जमीन स्वामित्व के चलते दावा के कारण विवाद के घेरे में आ गया यही नहीं यहां कि 17 बीघा भूमि पर राजस्व विभाग द्वारा अपना अधिकार बता यहां सरकारी भवन का निर्माण भी कर लिया गया लेकिन किसी को भी इसकी चिंता फिक्र नहीं हैं। वर्तमान में खलील क्लब की मुख्य इमारत के हाल यह है कि यह जगह-जगह से टूट चुकी है। दीवारों का प्लास्टर आज अपनी अंतिम सांसे ले रहा है। दरवाजे गायब हो चुके है दीवारें रंग रोगन के अभाव में बे रंग सी है। पानी की पीके बदहाली की कहानी खुद कहती है। अब बड़ा सवाल यह है कि कभी अपने वैभवशाली इतिहास की मिसाल रहा खलील क्लब क्या अपनी इन अव्यवस्थाओं के चलते दुबारा अपने वैभवपूर्ण इतिहास को दोहरा पाएगा?

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