November 13, 2018
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अन्धविश्वास की जकड़ में समाज।

By on October 13, 2018 0 23 Views

अन्धविश्वास के कारण खतरे में डाली मासूमों की जान।

अंधविश्वास से ग्रस्त लोग आज भी डाॅक्टर की बजाए भोपों की शरण में।

सादड़ी व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में नवजात बच्चें पुराने जमाने की रूढ़वादी सोच के कारण अन्धविश्वास का शिकार हुए हैं। आज भी लोग नवजात के उपचार के लिए डाॅक्टर की शरण की बजाए भोपो के दरबार में हाजिर हो रहे हैं। और अपनी मासूम बच्चो की जान को खतरे में डाल रहे हैं। पिछले 20 दिनों में डाम लगाने की दर्दनाक घटना चार बार सामने आ चूकी है। अन्धविश्वास से ग्रस्त एक ओर मामला सामने आया है की सादड़ी गांव के एक परिवार के लोगों ने भोपे के कहने पर मासूम बच्चें के आग से दहकते सरिये से छाती पर डाम लगवा दी। जिससे उसकी उपचार की बजाय हालत गंभीर हो गई। नवजात के परिजन न्यूमोनिया, सेप्सिस व श्वास रोग होने पर बच्चों को भोपाजी का देवरा पर धोक लगाने ले गए थे। लेकिन भोपा के दावे के मुताबिक उपचार होने के बजाय हालत गम्भीर होने पर परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे। ये बहुत ही दुःख पहुंचाने वाली बात है कि आज के क्रांतिकारी समय मे भी लोग ऐसी रूढ़ीवादी, अन्धविश्वास जैसी चीजों का शिकार हो रहे हैं।
नवजात के न्यूमोनिया, सेप्सिस व श्वास रोग होने के कारण भोपे ने गर्म लोहे से सरिए से छाती व पेट दाग कर डाम लगाए हैं। इससे मासूम गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। हालत ज्यादा खराब होने से सभी नवजातो को अस्पताल में भर्ती करवाया गया। डाॅक्टरों के मुताबिक दो बच्चों की हालत चिंताजनक बनी हुई हैं जबकि दो की हालत स्थिर है। उमेश पुत्र बाबूलाल जाट राजपुरा की आस्था व प्रसूता सन्तोष के नवजात शिशु अस्पताल में उपचाराधीन हैं। चिकित्सक डॉ. राजेंद्रसिंह राठौड ने बताया कि अस्पताल में भर्ती दो नवजात का उपचार जारी हैं।

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