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छात्रसंघ चुनावो में छात्र-छात्राओं की मौज।

By on August 29, 2018 0 58 Views
छात्र संघ चुनावो में लिंग दोह कमेटी की सिफारिशों की उडती धज्जिया …

कही शराब तो कही पुल पार्टीयो में मस्ती।

खाने की दावत ,और चुनावी प्रचार में दौड़ते गाड़ियों के काफिले |
कोटा ओर जयपुर जैसे बड़े शहरों छात्रसंघ चुनाव प्रचार अपने चरम है और प्रत्याक्षियों ने जंहा अपनी पूरी ताकत झोंक रखी है वही मतदाता छात्र-छात्राओं की मनुहार में जारी है शराब पार्टियों से लेकर पुल पार्टियों तक का दौर छात्र संघ चुनाव के नाम पर शराब पार्टी ,छात्र संघ चुनाव के नाम पर पूल पार्टी ,छात्र संघ चुनाव के नाम पर लाखो का खर्च ,छात्र संघ चुनाव के चक्कर में पढ़ाई का बेडा गर्क और इन सबको रोकने के लिए जारी लिंगदोह कमिटी की सिफारिशें और उलट उनकी हकीकत |
छात्रसंघ चुनाव का फीवर राजस्थान में चढ़ चूका हे ,,और फीवर आपको छात्र नेताओ के नारेबाजी से लेकर तस्वीरों में भी नजर आएगा एक तस्वीर हे गाड़ियों के काफिले की जी साहब ये किसी न किसी छात्र नेता के चुनाव प्रचार के लिए निकले काफिले की हे जो की अपने छात्र प्रतिनिधि के शक्ति प्रदर्शन का भी इजहार कर रही हे अब देखिये तस्वीर दूसरी ये स्विमिंग पूल का नजारा हे और चल रही हे पूल पार्टी ,,पूल पार्टी कोई गुनाह नहीं हे लेकिन ये सब स्टूडेंट्स ही हे और इस पूल पार्टी के ऑर्गनाइजर हे वो छात्र नेता जो छात्र संघ चुनाव के चुनावी समर में उतरे हुए हे और एन केन तन मन धन से हर संभव कोशिश हो रही हे की जैसे तैसे छात्रों को पटा कर उन्हें खुश कर उन्हें वोट के लिए मना लिया जाए ,,,इतना ही नहीं आपको बता दे की कोटा के ज्यादातर छात्र प्रत्याशी छात्र मतदाताओं को लुभाने के लिए हर वो कोशिश कर रहे हे जो नियमो के खिलाफ तो हे ही बल्कि गलत भी हे चुनाव प्रचार में इन दिनों जमकर चल रहा हे शराब पार्टी से लेकर खाने की दाबत का दौर |
जिन नियमो के दायरे के भीतर छात्र संघ चुनाव करवाए जाते हे उनकी कैसे हवा निकलती हे कैसे उन्हें हवा में उड़ाया जाता हे छात्र संघ चुनाव के लिए लिंगदोह कमिटी की सिफारिशें हे जिसमे नियम तय हे लेकिन सभी नियमो को तोडा जाता हे ताक पर रख दिया जाता हे चुनाव में छात्र सत्ता हांसिल करने के लिए लिए हर दावपेच चला जाता हे शराब पार्टियों का दौर छात्र प्रत्याशियों की तरफ़ से चलता हे तो साथ में चलता हे चुनाव प्रचार,खाने की बड़ी बड़ी दावत ,पूल पार्टी ,शराब पार्टी और गाड़ियों के काफिले ये सब देखने में आ रहा हे कोटा में और जिसमे फूँक दिए जाते हे लाखों रुपय इसी के साथ बर्बादी होती हे पढ़ाई की भी तो ऐसे में सवाल एक तो ये की आख़िर लिंगदोह कमेटी की सिफ़ारिशें क्यूँ नही होती सख़्ती से लागू दूसरा सवाल ते की आख़िर ऐसे छात्रसंघ चुनाव का क्या मतलब जो पढ़ाई की बर्बादी से लेकर छात्रों को शराब पार्टी में ला देता हे लाखों रुपय की बर्बादी ऐसे चुनाव में होती हे !
तो इस रिपोर्ट के जरिये आपने जाना की छात्र संघ चुनाव के नाम पर आखिर क्या कुछ चलता हे परदे के पीछे छात्र प्रत्याषी किस हद से गुजरते हे जाना आपने और जो नियम के दायरे हे छात्र संघ चुनाव की सिफारिशें हे वो कितना कोशो दूर रह जाती हे और छात्र प्रत्याशी सभी नियमो की हवा उड़ा देते हे और ताक पर रख देते हे |
ऐसे में सवाल यह भी उठता है कि आखिर इन चुनावों में खर्च होता अपार धन ओर बल क्यो इन चुनावों में खर्च होता है और लिंगदोह जैसी कमेटियों का औचित्य ही आखिर क्या है।
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