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हड़ताल, लोक परिहवन और हंगामा – हादसा टला

By on October 2, 2018 0 220 Views

मनाही के बावजूद बस के पास से संचालित हो रहे है लोक परिवहन वाहन

लोक परिवहन और निजी वाहन यात्रियों से वसूल रहे हैं दुगुने दाम

टोंक (रोहित कुमार) l 16 दिनों से चल रही रोडवेज की चक्काजाम हड़ताल के तहत केंद्रीय रोडवेज बस स्टेण्ड पर धरना देकर बैठे रोडवेजकर्मियों को गुस्सा उस समय ओर अधिक बढ़ गया हैं जब बस स्टेण्ड पास से लोक परिवहन को गुजरते हुए उन्होंने देख लिया हैं। जिसके बाद लोक परिवहन के संचालन विरोध करते हुए कर्मचारी बस के पास पहुंचे और हंगामा करने लगे। वही इस पूरे हंगामे के दौरान एक बड़ा हादसा हो सकता था और एक रोडवेजकर्मी को अपनी गंवानी पड़ सकती थी लेकिन समय रहते साथी कर्मचारियों की तत्परता ने कर्मचारी की जान बचा ली। दरअसल हंगामा करने के दौरान वह कर्मचारी बस के सामने आ गया था और बस रोकने की मांग करने लगा हैं लेकिन दूसरी ओर से अन्य रोडवेजकर्मी चालक के पास जाकर हंगामा करने लगे, इसी हड़बडाहट में लोक परिवहन बस का चालक बस रोकना भूल गया है और गाडी आगे बढ़ा दी और बस के सामने खड़ा कर्मचारी बस के नीचे आ गया लेकिन साथी कर्मचारियों और पास ही खड़े लोगो ने उसे खींच लिया, जिससे उसकी जांन बच गई। वही दूसरी ओर इस पूरे मामलंे तिलमिलाए कर्मचारियों ने चालक को खींचकर बस के बाहर निकाल लिया और पुलिस को सुपुर्द कर दिया। हम आपकों बता दे इस पूरे हंगामे के दौरान पुलिस एवं यातायात पुलिस के जवान इस दौरान मौके पर मौजूद रहे। लेकिन ना तो वह हंगामा होने से रोक पाए और ना ही रोडवेज कर्मचारियों। वही इस दौरान लोक परिवहन बस में सवार यात्री काफी देर परेषान होते रहे।
दूसरी ओर लोक परिवहन से यातायात करना एक विकलांग यात्री को उस समय भारी पड़ गया हैं जब उसे जयपुर से बूंदी जाने के दौरान टोंक तक 200 रूपए किराए के रूप में चुकाने पड़े। घांस निवासी दिव्यांग गिर्राज खटीक ने टांेक बस स्टेण्ड पहुंचकर अपनी आपबीती मीडिया को सुनाई। उसने बताया कि अपना विकलांग कार्ड लेकर वह लोक परिहवन बस में चढ़ा लेकिन कुछ दूर जाने पर ना तो उसे सीट ही मिली और जब परिचालक को उसने अपना कार्ड दिखाया और उसने साफ कह दिया और यह यहा नही चलेगा यात्रा करनी हैं तो पैसे चुकाने पडेंगे और उससे 150 रूपए लेकर निवाई उतार दिया गया, जबकि वहां से टोंक पहुंचने में उसके 50 रूपए भी खर्च हो गए हैं जिससे अब विकलांग के सामने धर्मसंकट आ गया हैं उसे बूंदी जाना लेकिन पैसे नही होने की वजह से वह आगे सफर नही कर पाएगा।
लोक परिवहन बसों को रोडवेज बस स्टेण्ड से दूर संचालित करने, रोडवेजकर्मियों को भर्ती करने सहित कई मांगो को लेकर रोडवेज से जुडे विभिन्न संगठनों ने संयुक्त मोर्चा बनाकर सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं और राजस्थान रोडवेज श्रमिक संगठनों के सयुक्त मोर्चा की ओर से पिछले 16 दिन से चक्काजाम हडताल जारी हैं। वही लोक परिवहन बसों के संचालन का विरोध कर रहे रोडवेजकर्मियों का विरोध आज के दोनो वाक्यों सही साबित होता है कि आखिर क्यू वह रोडवेज के निजीकरण का विरोध कर रहे थे। वही बस स्टेण्ड के पास लोक परिवहन बस के संचालन के बाद उनका संचालन स्टेण्ड से कम से कम 500 मीटर की दूरी से करने का तय होने के बावजूद बस स्टेण्ड की सीमा में घुसने से लोक परिवहन के चालक बाज नही आते है। बस स्टेण्ड स्थित चैकी में मौजूद पुलिसकर्मियों ने इसकी शिकायत की, जिसके बाद पुलिस ने रोडवेजकर्मियों के विरोध को देखते हुए उससे परमिट की पूछताछ की।
 वही दूसरी ओर 16 दिन से चक्काजाम हड़ताल कर रहे कर्मचारियों ने बताया कि चक्काजाम हड़ताल सरकार या परिवहन विभाग की ओर से कोई भी उनसे अब तक बात करने नही आया हैं। सरकार अपनी हठधर्मिता कर्मचारियों पर थोप रही हैं जिससे कर्मचारियों में सरकार के प्रति आक्रोश कई गुना बढ़ गया हैं है। हम आपकों बताया कि पिछले 16 दिन से रोडवेज संगठनों की इस बेमियादी चक्काजाम हड़ताल के कारण राजस्थान के अन्य डीपों की तरह टोंक डीपों करीब डेढ करोड से ज्यादा के राजस्व नुकसान हो चुका है। लेकिन ना तो सरकार और ना ही रोडवेज श्रमिक संगठन से जुडे पदाधिकारियों को इसे कोई सरोकार नजर आ रहा हैं
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