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टोंक स्थापना दिवस पर उद्योग और पर्यटन की बात…

By on December 24, 2018 0 148 Views

टोंक का 1073वां स्थापना स्थापना दिवस पुरानी टोंक स्थित गढ़ में समारोहपूर्वक मनाया गया। भले ही टोंक को बसे 1072 से ज्यादा साल का समय हो गया हो लेकिन पिछले 28 सालों से हर साल की तरह आज भी पूजा-अर्चना के साथ टोंक की स्थापना की 1073 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में टोंक महोत्सव की षुरूआत हुई। लेकिन इस बार समारोह में आए अतिथियों से लेकर वक्ताओं ने टोंक के विकास के लिए उद्योगो एवं पर्यटन के विकसित करने की जरूरत बताई।

आज से ठीक 1073 साल पहले राजा रामसिंह सोलंकी ने आज ही के दिन टोंक की नींव रखी थी, आज का टोंक जो उस उमय टूंकडा के नाम से जाना जाता था कई सालों तक राजा रामसिंह और उनके वंशजों ने टोंक पर शासन किया था, राजा रामसिंह द्वारा बनाये गए प्राचीन गढ मे टोंक का स्थापना दिवस परम्परागत रूप में गढ़ की माता की प्रतिमा की पूजा-अर्चना कर मनाया गया। हर साल की तरह आज भी टोंक स्थापना दिवस पर महज औपचारिता दिखाई दिया। लेकिन इस बार विकास की हवाई बातों के अलावा समारोह में मुख्य अतिथि रहे एसडीएम सीएल षर्मा सहित अन्य अतिथियों रहे साहित्यकारों एवं समाजसेवियों ने टोंक में पिछडेपन का मुख्य कारण यहां पर उद्योगो एवं पर्यटन की कमी को बताया। इसलिए उन्होने टोंक स्थापना दिवस को आगामी दिनों में इस कार्यक्रम को ओर अधिक भव्य मनाने के लिए प्रषासन के सहयोग की बात कही। जिसपर एसडीएम सीएल षर्मा ने अगले साल कार्यक्रम में प्रषासन की सहभागिता का आष्वासन दिया। साथ ही उन्होने कहा कि यहां पर उद्योग धंधों एवं पर्यटन के विकास के लिऐ भी वह प्रयास करेंगे और यहां के किसानों से अपील की वह अपनी जमीन को व्यवसायिक उपयोग के लिए प्रयास करेंगे तो प्रषासन उनकी पूरी मदद करेगा।

वही दूसरी ओर राजा रामसिंह को ख्वाजा की उपाधि होने के कारण उन्हे ख्वाजा रामसिंह के नाम से भी जाना जाता था। राजा रामसिंह के बाद टोंक में कई राजवंषों का राज्य रहा ओर चूंकि आजादी से पूर्व यहां नवाबांे का शासन रहा हैं। इसलिए इसे नवाबी नगरी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसे में टुकडा से टोंक बने टोंक ने भले ही एक लम्बा सफर तय कर लिया हो पर देखने मे आता है कि राजनेतिक उपेक्षा और प्रषासनिक उदासहीनता के चलते आज भी ऐसे समारोह महज औपचारिकता बनकर रह जाते हैं वही टोंक जिले मे भले ही पर्यटन की अपार संभावनाये हो पर आज भी टोंक के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल उपेक्षित है और राजस्थान के पर्यटन मानचित्र पर अब तक टोंक अपनी जगह नही बना पाया हैं। वही कई सालों से इससे मनाते आ रहे ख्वाजा रामसिंह के वंषज हनुमानसिंह सोलंकी उस समय किए टोंक के विकास के लिए किए काम गिनाए।

हम आपकों बता दे आज सुबह 10 बजे पुरानी टोंक स्थित गढ़ से पूजा-अर्चना के साथ षुरू हुए टोंक महोत्सव में कई लोकरंजन, खेल और संस्कृति से संबंधित आयोजन किए जायेगें। इस बार टोंक महोत्सव की थीम ‘संकल्प उत्सव स्वस्थ टोंक का’ है, जिसके तहत टोंक महोत्सव समिति द्वारा आगामी वर्ष भर किसी भी प्रकार के व्यसन के विरूद्ध अभियान चलाने का संकल्प लिया जाएगा, साथ ही महोत्सव अवधि के दौरान टोंक की गंगा जमुनी तहजीब और विरासत के प्रति जनचेतना जागृत करने के लिए अभियान एवं कार्यक्रम आयोजित किए जाऐंगे।

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