March 23, 2019
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बड़ी लड़ाई से पहले बदलता माहौल ।

By on December 24, 2018 0 50 Views

 

जनतंत्र का खेल निराला है। इसमें कभी अजेय विजेता भी पराजित हो जाते हैं और कभी पराजित के हाथ भी विजयश्री आ जाती है। हाल में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी पूर्वोत्तर में स्थित मिजोरम में पराजित हुई और दक्षिणी प्रांत तेलंगाना में उसका एक तरह से मानमर्दन हो गया, किंतु हिंदी पट्टी के तीन महत्वपूर्ण राज्यों मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में उसे जीत हासिल हुई। इनमें से दो राज्यों मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में पिछले पंद्रह वर्षा से लगातार जीतती आ रही है भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा। हालांकि कांग्रेस इन तीन राज्यों को जीतकर सरकार बना चुकी है, किंतु यहां पर देखना होगा कि खासकर राजस्थान व मध्यप्रदेश में भाजपा और उसके बीच मतों का अंतर बहुत अधिक नहीं है। भाजपा ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में बहुत कम सीटों के अंतर से ही कांग्रेस के हाथों सत्ता गंवाई है। छत्तीसगढ़ में अवश्य उसे बड़ी पराजय झेलनी पड़ी है। हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों के चुनाव नतीजे बताते हैं कि मध्य प्रदेश में पंद्रह में से तकरीबन तेरह साल तक भाजपा सरकार की कमान संभालने वाले शिवराज सिंह चैहान के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर होते हुए भी जनता के दिल में उनके लिए एक नरम कोना कायम रहा।

बहरहाल, चाहे जिन कारणों से ऐसे परिणाम आए हों, लेकिन अब आगे यह देखने की जरूरत है कि इन परिणामों के भविष्य में क्या राजनीतिक निहितार्थ होंगे? भाजपा और कांग्रेस की राजनीति पर इनका क्या असर पड़ेगा? देश के इन दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए भविष्य में क्या चुनौतियां होंगी? इन परिणामों से एक तो कांग्रेस और उसके कार्यकर्ताओें का मनोबल बढ़ेगा। कांग्रेस के भीतर राहुल गांधी का नेतृत्व पूरी तरह स्थापित हो जाएगा। उनकी योग्यता एवं क्षमता पर कार्यकर्ताओं के बीच कोई संशय उठता भी रहा होगा तो वह निर्मूल हो जाएगा। महागठबंधन की राजनीति में वह विपक्ष के नेता बनकर उभर सकते हैं। शायद इन चुनावों का प्रभाव और इनसे उभरे मु६े 2019 में भी कांग्रेस के एजेंडे में महत्वपूर्ण होंगे। इन चुनावों ने जहां कांग्रेस के लिए नई संभावनाएं खोली है, वहीं कई बड़ी चुनौतियां भी खड़ी की है। कांग्रेस ने इन चुनावों में किसानों की कर्ज माफी और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने के जो लोक लुभावन वादे किए है, उन्हें 2019 के चुनाव की घोषणा के पूर्व ही प्राथमिकता के आधार पर पूरा करना होगा।

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