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मध्य प्रदेश और राजस्थान में यूरिया का संकट।

By on December 26, 2018 0 45 Views

 

प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में गेहूं कि बुवाई हो चुकी है और फसल को खाद की जरूरत पड़ रही है। खाद की कमी को लेकर किसान धरने प्रदर्शन भी कर रहे हैं। किसान सुबह से कंबल ओढ़ कर यूरिया वितरण केंद्रो पर लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं। हालत यह है कि पुलिस की निगरानी में किसानों को आधार कार्ड पर एक या दो कटट्े वितरित किये जा रहे हैं। किसानों को कहना है कि रबी की फसलों में सिंचाई के साथ यूरिया खाद की जरूरत होती है। गेंहू और लहसुन का उत्पादन घट सकता है। किसानों को इस बार लहसुन का अच्छा भाव नहीं मिला, इसके चलते लहसुन की बुआई को छोड़ किसान गेहंू का रूख कर चुके हैं, जिससे यूरिया की मांग में वृद्धि हुई है। एक तरफ राज्य सरकारें किसानों को ऋण माफ कर रही है, किसानों के मुद्दे पर जमकर राजनीति की जा रही है, दूसरी तरफ किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। दरअसल राजस्थान और मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकारें बनते ही यूरिया का संकट पैदा हो गया है। यूरिया की खरीद के लिए किसानों की लंबी-लंबी कतारें लग गई। यूरिया की काला बाजारी हुई। किसानों को 266 रूपये की बोरी खरीदने के लिए 350 रूपये चुकाने पड़े। यूरिया संकट से किसानों का आक्रोश बढ़ गया। प्रदेश के कई जिलों में यूरिया की कमी देखी गई। देश में 2 लाख 5 हजार टन उत्पादन यूरिया का होता है। हर वर्ष 1.65 लाख टन यूरिया आयात किया जाता है। देश की कंपनियां उत्पादित यूरिया सेंट्रल पूल को देती है। सेंट्रल पूल से मार्कफैड के गोदामों में जाता है। वहां से प्राथमिक साहकारी सोसायटी को भेजा जाता है। 80 प्रतिशत यूरिया सोसायटी के जरिये और 20 प्रतिशत यूरिया व्यापारियों के जरिये किसानों को मिलता है। देश में यूरिया की कोई कमी नहीं, फिर भी ऐसे हालात क्यों पैदा हुए? कांग्रेस और भाजपा में इस संकट पर वाकयुद्ध भी तेज है। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह यूरिया आवंटन् में कमी पर राजनीति कर रही है। लेकिन भाजपा कह रही है कि केंद्र सरकार ने मध्यप्रदेश को मांग से ज्यादा यूरिया दिया है। जब यूरिया मध्यप्रदेश को ज्यादा दिया गया, तो सहकारी समितियों से यूरिया कहां गायब हो गया?

किसानों पर चली पुलिस की लाठियां ।

मध्य प्रदेश में यूरिया को लेकर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुना जिले में तो सोमवार को खाद वितरण के दौरान बवाल इतना बढ़ गया कि पुलिस को हंगामा कर रहे किसानों पर लाठियां भांजनी पड़ी। इन दिनों राज्य के अन्य क्षेत्रों की तरह गुना में भी खाद को लेकर मारामारी मची हुई है। सिर्फ गुना ही नही बल्कि छतरपुर जिले में भी खाद वितरण को लेकर किसानों में रोष है और उन्होंने जबरदस्त हंगामा किया। गुना के नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी में सोमवार को किसान लाइन लगा कर खाद ले रहे थे। खाद बांटने में देरी की वजह से किसानों का सब्र जवाब दे गया और वो हंगामा करने लगे। हंगामा बढ़ते देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर किसानों को खदेड़ा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से सांसद हैं और उनके ही संसदीय क्षेत्र में किसानों को यूरिया के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
सिर्फ गुना ही नही बल्कि छतरपुर जिले में भी खाद को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। खाद के लिए सुबह से लंबी कतार में लगे किसानों ने देरी से नाराज होकर किसान सुविधा केंद्र के सामने नेशनल हाइवे पर ट्रैक्टरों को खड़ा कर जाम लगा दिया। मामले की जानकारी मिलते ही पुलिसकर्मियों ने समझबूझ के साथ मामला शांत करवाया और जाम खुलवाया।

जल्द खत्म होगा संकट :-

दूसरी ओरए मध्य प्रदेश की नई सरकार का दावा है कि केंद्र से लगातार बातचीत के बाद प्रदेश में यूरिया संकट धीरे.धीरे खत्म होने के आसार हैं। कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक केंद्रीय उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय ने 25 हजार मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति तत्काल किए जाने की सहमति दी है। विभाग के मुताबिक दिसंबर में मध्य प्रदेश में अब तक करीब 2 लाख 15 हजार मीट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति हुई है जबकि करीब 50 हजार मीट्रिक टन यूरिया प्रदेश में पहुंचने वाला है।

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