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प्रदेश भर में मौसमी बीमारियों का कहर…! 

By on October 4, 2018 0 47 Views

जयपुर में ‘जीका’ वायरस, 10 दिन में दो मरीजों में वायरस की पुष्टि से मचा हडकंप

विभाग के अफसर सोए, न सर्वे न फॉगिंग
जयपुर में जांच की सुविधा नहीं, पुणे भेजने पड़ते हैं सैंपल
जयपुर . अभी तक जहां मौसमी बीमारियों ने ही परेशान कर रखा था, वहीं अब स्क्रब टायफस से हो रही मौतें और जीका वायरस के केसों ने चिकित्सा विभाग के साथ आमजन में एक देहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
प्रदेश में पहली बार ‘जीका’ वायरस के एक के बाद एक लगातार दो केस सामने आने के बाद राज्यभर के लोगों में एक भय से बैठ गया है। लेकिन  बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि प्रदेश में जीका वायरस लोगो में आखिर कैसे पहुंचा और इस वायरस से सम्बन्धी कितने मरीज बढ़ सकते हैं। क्योंकि दोनों केस एक ही क्षेत्र (शास्त्री नगर) के हैं और अभी कई मरीजों के सैंपल पुणे लेबोरेट्री में जांच के लिए गए हुए हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक संभव है कि अभी प्रदेश में जीका वायरस के और भी केस सामने आ सकते हैं।
चिकित्सा विभाग इस बात की भी जांच करने में लगा है कि आखिर राजस्थान में जीका वायरस कहां से आया। दूसरा यह कि शास्त्री नगर के अलावा वे कौनसे इलाके हो सकते हैं जहां जीका वायरस के मरीज मिल सकते हैं। लेकिन प्रदेश में हर साल बढ़ रही बीमारियों की वजह, जिम्मेदार कौन और कैसे इन पर लगाम लगाई जा सकती है। इस मामले में चिकित्सा विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक सुझाव में लगे हुए है कि आखिर हम इन खतरनाक बीमारियों से कैसे अपने आप व अपने देशवासियों को सुरक्षित रख सकते हैं।

पूरे शहर में सिर्फ शास्त्री नगर पर नजर, बाकी सब पर अनेदखी-

जहां मच्छर, बस वहीं फॉगिंग : मलेरिया, डेंगू और जीका वायरस जैसी मच्छरजनित बीमारियां बढ़ने का एक कारण नगर निगम की ओर से समय पर फोगिंग नहीं करवाना है। एंटी लार्वा गतिविधियां भी महज औपचारिकता ही रही हैं। जीका वायरस का पहला केस सामने आने के बाद भी नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की ओर से शास्त्री नगर में तो अलर्ट जारी कर फॉगिंग और मच्छरों को खत्म करने के उपाय किए जाने लगे, लेकिन शेष शहर और अन्य जिलों में फॉगिंग के लिए टीम ही नहीं पहुंची। पॉजिटिव केसेज के आसपास के करीब 40 हजार घरों का सर्वे नहीं किया गया। मरीज मिलने वाले इलाके में ही चिकित्सा विभाग की टीम सर्वे करती है। जबकि टीम की ओर से सैंपल सर्वे किया जाना चाहिए। कुछ ही मरीज सामने आने के बाद इलाज की प्रक्रिया शुरू कि जानी चाहिए। ऐसा नहीं किए जाने से किसी भी क्षेत्र में काफी लोग अचानक से बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।

मच्छर के काटने से फैलता है जीका वायरस-

1947 में सबसे पहले युगांडा में मिला था जीका वायरस। एडीज एजिप्टाई मच्छर के काटने से जीका वायरस फैलता है।
कई दिन तक तेज सर्दी के साथ बुखार होगा। सिरदर्द, आंखें लाल होना, जोड़ों व मांसपेशियों में दर्द, शरीर पर लाल चकते, खुजली, हाथ-पैर में सूजन प्रमुख लक्षण हैं। एसएमएस मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायलोजी विभाग के प्रोफेसर डॉ.रमेश मिश्रा का कहना है कि जीका में कई बार लक्षण नहीं दिखते है। बीमारी बढ़ने पर न्यूरोलॉजिकल और ऑर्गन फेलियर हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान नवजात में न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर और ब्रेन डेमेज तक हो सकता है।
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