January 18, 2019
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दिल्ली में किसानों का संघर्ष।

By on December 1, 2018 0 40 Views

 

देशभर से आए हजारों किसानों ने शुक्रवार को दिल्ली के रामलीला मैदान से संसद तक मार्च निकाला। किसान मुक्ति मोर्चा की अगुवाई में 200 से ज्यादा संगठनों से जुड़े किसानों के इस मार्च का मकसद सरकार को संसद का तीन सप्ताह का विशेष सत्र बुलाने के लिए मजबूर करना है। किसानों की मांग है कि इस विशेष सत्र में दो विधेयक पारित किए जाएं। पहल-देशभर के किसानों की एकमुश्त कर्जमाफी और दूसरा-कृषि उत्पादों का लाभकारी मूल्य दिलवाने की गांरटी। जंतर-मंतर पर मार्च सियासी रैली में तब्दील हो गया। आठ विपक्षी दलों के नेताओं के साथ पहली बार राहुल गांधी व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी एक मंच पर दिखे। इस दौरान सभी के निशाने पर मोदी सरकार थी।

राहुल गांधी ने कहा कि किसानों और युवाओं के लिए एक होना पड़ेगा। राहुल ने कहा, देश का किसान आपके (मोदी के) दोस्त अनिल अंबानी का विमान नहीं मांग रहा, वह सिर्फ अपना हक मांग रहा है। आज हिंदुस्तान के सामने दो बड़े मुद्दे हैं, पहला किसाने के भविष्य का मुद्दा और दूसरा युवाओं के रोजगार का। इनके भविष्य के लिए जनता को अगर मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को बदलना पड़े तो बदल दो। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कह है कि मैं दिल्ली का मुख्यमंत्री हूं। इस नाते आप लोगों का दिल्ली में स्वागत है। आप बार-बार दिल्ली आइए। मुझे दुख इस बात का है कि आप दिल्ली दुख की घड़ी में आए हैं, दुखी होकर आए हैं। सरकार से नाराज होकर आए हैं। भाजपा ने पिछले चुनाव के पहले किसानों से जितने वादे किए थे, उन सारे वादों से मुकर गई। स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करने का वादा किया था, 100 रुपए लागत पर 50 रुपए मुुनाफा देंगे। अब सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया कि स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू नहीं कर सकते। याद रहे कि किसानों ने गुरुवार को भी 26 किलोमीटर लंबा मार्च निकाला था। इसमें बिहार, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक आदि राज्यों किसान शामिल थे। इस दौरान स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव और मेधा पाटकर भी शामिल हुईं।

इससे पहले अक्टूबर में किसानों ने दिल्ली में कर्जमाफी, गन्ना का बकाया समर्थन मूल्य और स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट की सिफारिशों को तुरंत लागू करने की मांगों को लेकर धरना दिया था। इस दौरान पुलिस और किसानों में झड़पें भी हुई थीं। हालांकि, सरकार से बातचीत के बाद किसान संगठनों ने आंदोलन खत्म कर दिया था। किसानों को फसल के पूरे दाम मिल गए तो किसान कभी कर्ज नहीं मांगेंगे। आज किसानों को हाथ फैलाना पड़ता है। जब किसान मार्केट में फसल बेचने जाता है तो खरीदने वाला नहीं मिलता। किसानों की फसल का दाम तय किया जाए। बीमा कंपनी के मालिक किसानों के अकाउंट से पैसे निकाल लेते हैं। ये बीजेपी की किसान डाका योजना है।

दिल्ली के सीएम केजरीवाल ने कहा कि जिस देश के अंदर किसानों को आत्महत्या करनी पड़ी, जिस देश का किसान खुद भुखमरी का शिकार हो। ऐसा देश कभी तरक्की नहीं कर सकता। भारतीय जनता पार्टी ने किसानों से जो वादे किए उससे बीजेपी मुकर गई। किसानों को 100 रुपए में से 50 रुपए मुनाफा देंगे। सबसे पहले जितना कर्ज किसानों का है वो सारा कर्ज माफ होना चाहिए। दूसरी मांग किसानों को फसल का पूरा दाम मिलना चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कहा था कि बोनस मिलेगा। आज हालत क्या है आप बीमा का पैसा देते हो तो अनिल अंबानी की जेब में आपका पैसा जाता है। आपका कर्जा माफ नहीं किया जाता। हिंदुस्तान का किसान मोदी जी से अनिल अंबानी का हवाई जहाज नहीं मांग रहा है। हमारी मेहनत के लिए भी आपको हमारा कर्जा माफ करना ही पड़ेगा। आज हिंदुस्तान के सामने दो बड़े मुद्दे हैं। एक मुद्दा हिंदुस्तान में किसान के भविष्य का मुद्दा दूसरा देश के युवाओं के भविष्य का मुद्दा। पिछले साढ़े चार साल में नरेंद्र मोदी ने 15 अमीर लोगों का कर्जा माफ किया है। अगर 15 अमीर लोगों का कर्जा माफ किया जा सकता है तो किसानों का कर्ज माफ क्यों नहीं किया जा सकता?

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