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फिर टली राम मंदिर और बाबरी मस्जिद पर सुनवाई

By on October 29, 2018 0 151 Views

अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद जमीन विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई जनवरी तक के लिए टाल दी है. इस मामले में सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच सुनवाई कर रही है. कोर्ट के फैसले से पहले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि हिंदुओं का सब्र अब टूट रहा है. उन्होंने कहा, मुझे भय है कि हिंदुओं का सब्र टूट गया तब क्या होगा? राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ कई याचिकाएं शीर्ष अदालत में दायर की गई हैं. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) रंजन गोगोई और जस्टिस संजय किशन कौल व जस्टिस के एम जोसफ की बेंच इस मामले में दायर अपीलों पर सुनवाई करेगी. शीर्ष अदालत ने 27 सितंबर को 1994 के अपने उस फैसले पर पुनर्विचार के मुद्दे को पांच जजों वाली बेंच को सौंपने से इनकार कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ है. यह मुद्दा अयोध्या भूमि विवाद की सुनवाई के दौरान उठा था. अब जनवरी में तय होगा कि सुनवाई कब होगी. सुप्रीम कोर्ट में आज तीन जजों की नई बेंच ने अयोध्या में जमीन विवाद मामले की सुनवाई की। नई बेंच में मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई, संजय किशन कौल और जस्टिस के एम जोसेफ शामिल थे. उन्होंने मामले की सुनवाई टाल दी है. दरअसल, इलाहबाद हाइकोर्ट ने 2010 में विवादित 2.77 एकड़ जमीन को तीनों पक्षकारों भगवान रामलला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड के बीच बराबर-बराबर बांटने का फैसला सुनाया था. जिसके विरोध में कई पक्षों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी.

 

आंकड़ों के नजरीए से देखे जमीनी विवाद:-

1949 : बाबरी मस्जिद के भीतर भगवान राम की मूर्तियां देखी गई।
 सरकार ने परिसर को विवादित घोषित कर भीतर जाने वाले दरवाजे को बंद किया
1950 : फैजाबाद अदालत में याचिका दायर कर मस्जिद के अंदर पूजा करने की मांग। हिंदुओं को मस्जिद के भीतर पूजा करने की इजाजत, भीतरी प्रांगण बंद।

1959 : निर्मोही आखड़ा ने याचिका दायर कर मस्जिद पर नियंत्रण की मांग की।
1961 : सुन्नी वक्फ बोर्ड की याचिका, मस्जिद से मूर्तियों को हटाने की मांग।
1984 : वीएचपी ने राम मंदिर के लिए जनसमर्थन जुटाने का अभियान शुरू किया।
1986 : फैजाबाद कोर्ट ने हिंदुओं की पूजा के लिए मस्जिद के द्वार खोलने के आदेश दिए।
1989 : राजीव गांधी ने विश्व हिंदू परिषद को विवादित स्थल के करीब पूजा की इजाजत दी।
 वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने राम मंदिर के समर्थन में रथ यात्रा निकाली। बिहार के समस्तीपुर में लालू सरकार ने आडवाणी को गिरफ्तार किया
 1992: कारसेवकों ने बाबरी मस्जिद गिराया, अस्थाई मंदिर का निर्माण किया। देशभर में दंगे हुए जिसमें 2000 से अधिक लोगों की जानें गई।
1992 : केन्द्र सरकार ने जस्टिस लिब्रहान की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया।

2003 : इलाहाबाद हाइकोर्ट ने ।ैप् को विवादित स्थल की खुदाई का आदेश दिया। रिपोर्ट में मस्जिद के नीचे मंदिर के संकेत।
 2010 : इलाहाबाद हाइकोर्ट ने विवादित जमीन को तीन भाग में बांटने के आदेश दिए।
अलग-अलग पक्षकारों ने हाइकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

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