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फरवरी 2018 में हुआ बाघिन का शिकार, विभाग बताता रहा लापता

By on October 27, 2018 0 42 Views

आरोपी ने कहा, फरवरी में पांच लोगों ने मिलकर किया था शिकार

देश भर में भले ही बाघों के संरक्षण को लेकर बड़ी-बड़ी बाते कही जाती हो, लेकिन आठ माह बाद एक ओर बाघ के शिकार की घटना सामने आने से उनके दावों की पोल तो खुली ही सही, विभाग का लापरवाह रवैया भी सामने नजर आया। क्योंकि विभाग उस बाघ को लापता बता रहा था जिसकी मौत आठ माह पहले पांच शिकारियों के हाथो हो गई। इस घटना के बाद ये भी साफ हो गया कि वन विभाग वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कितनी भी कोशिश कर ले लेकिन वो शिकारियों पर लगाम नहीं लगा पा रहा है। ओर वन्यजीवों के शिकार को रोकन के लिए सख्त कदम नहीं उठा रहा है। आठ माह पहले सरिस्का से लापता हुई बाघिन एसटी 5 की आठ माह बाद आखिर मौत की पुष्टि हो गई है। सरिस्का अभ्यारण के भीतर घुसकर उसे 5 शिकारियों ने फंदा लगाने के बाद गोली से मार डाला था। बाघिन के खाल, नाखून और मांस गुड़गांव में एक दलाल को करीब डेढ़ लाख रुपए में बेचे गए थे। एक आरोपी ने बाघिन के दांत का ताबीज बना लिया। सरिस्का प्रशासन ने शिकार के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसे कोर्ट में पेश कर इकबालिया बयान के आधार पर रिमांड पर लिया है। आरोपी 30 वर्षीय सरफुद्दीन मालाखेड़ा थाना क्षेत्र के भडोली गांव का है। शिकार में साथ रहे चार अन्य आरोपी फरार बताए गए हैं। बाघिन के मृत अवशेष भी बरामद करना बाकी है। बाघिन एसटी-5 फरवरी माह में लापता हो गई थी। करीब एक हफ्ते तक वन अधिकारी इस मामले को दबाए रहे। खुलासा होने के बाद भी 3 माह तक उसे जंगल में ही कहीं होने की बात कह शिकार से इनकार करते रहे थे। आरोपी सरफुद्दीन व परिवार के खेत सरिस्का की अकबरपुर रेंज के तन आनंदपुरा में हैं। उसने बयान में बताया कि बाघिन के शिकार में पांच लोग शामिल थे। जंगली जानवरों को फसल तक पहुंचने से रोकने के लिए उसने फंदा लगाया था। इसमें बाघिन एसटी-5 फंस गई। उसकी आवाज सुन मौके पर पहुंचे तो बाघिन को गोली मार दी। बाघिन घायल होकर भागी और जंगल में ढेर हो गई। कुछ देर आवाज नहीं आई तो शिकारी मौके पर पहुंचे और कई बार पत्थर मार उसकी मौत की पुष्टि की। बाघिन के शरीर में कोई हरकत नहीं होने पर उसका मांस, खाल व अन्य अंग निकालकर बेच दिए। बयानों में आरोपी ने बताया कि बाघिन का शिकार करने के बाद आरोपियों ने डेढ़ लाख रुपए में बाघिन की खाल और मांस का गुड़गांव में एक दलाल से सौदा किया। सौदे में मिली रकम में करीब 50 हजार रुपए अपने पास रखे। बाकी आरोपियों को 25-25 हजार रुपए बांट दिए। शिकार में शामिल एक आरोपी के संतान नहीं है। किसी ने उसे यह बताया कि बाघिन का दांत गले में बांधने से संतान हो सकती है। इसके चलते बाघिन एसटी 5 का एक दांत लेकर ताबीज बना लिया। सरिस्का में बाघिन एसटी-5 की मौत भी शिकारियों के हाथों होने के खुलासे से घबराए विभाग के अधिकारी पूरी कार्रवाई गुप-चुप में निपटा रहे हैं। आरोपी को 23 अक्टूबर को हल्दीना गांव में ट्रैक्टर मिस्त्री की दुकान से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद 24 अक्टूबर को शाम करीब साढ़े पांच बजे अलवर के एसीजेएम पवन जिनवाल की कोर्ट में पेश किया गया। वन अधिकारियों ने सबूत बरामदगी और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए सरफुद्दीन का 6 दिन का रिमांड मांगा। कोर्ट ने उसे 4 दिन के फॉरेस्ट रिमांड पर सौंपा। इसके बाद से वन अधिकारी मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। याद रहे कि बाघिन एसटी 5 जुलाई 2010 को रणथंभौर से लाकर सरिस्का में छोड़ी गई थी। यह युवा थी लेकिन शावकों को जन्म नहीं दिया। रेडियो कॉलर लगा था, लेकिन लापता होने से करीब कुछ दिन पहले सिग्नल देना बंद कर दिया था। बाघिन एसटी-5 उमरी क्षेत्र में रहती थी। अंतिम बार रेडियो कॉलर के सिग्नल उमरी के खेतड़ा में मिले थे।

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