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आज का श्रवण कुमार निकला रामदेवरा को

By on August 29, 2018 0 532 Views

 

मां को कंधे पर बिठाकर 450 किलोमीटर का सफर।

 शंम्भूगढ़ के दिनेश कुमार का नाम हर जुबान पर।

सब की यही दुआ की हर माता-पिता को दिनेश कुमार जैसा पुत्र मिले हो भी क्यो नही यह दुआ आसींद के शंम्भूगढ़ के रहने वाले दिनेश कुमार ने कुछ ऐसा ही साहस दिखाया हैं कि वह 450 किलोमीटर के रामापीर रामदेवरा के सफर पर अपनी मां को कंधों पर लेकर निकला है और जंहा से भी गुजरता है लोग मुक्त कंठ से आज के श्रवण कुमार की प्रशंसा करते नजर आते है।

आज के दौर में जंहा आए दिन कलयुगी पुत्रो द्वारा अपने बुजुर्ग माँ बाप के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं अक्सर देखने को मिलती है पर इस कलयुग में आज भी श्रवण कुमार जैसा बेटा जीवित है जो अपने बुर्जुग माता-पिता की मनोकामना पूरी करने के लिए उन्हें अपने कंधे पर बैठा कर यात्रा करवाने रामदेवरा के लिए निकला है ये कलयुग का श्रवण कुमार जो आज त्रेता युग के उस श्रवण कुमार की याद ताजा करा रहा है जो अपने अंधे माता पिता की आंखों का तारा था कोन सोच सकता है कि इस कलयुग में श्रवण जैसा पैदा हो सकता है जो अपनी माँ की इच्छा पूरी करने के लिए अपने कंधे पर बैठाकर उन्हें रामदेवरा पैदल यात्रा के लिए लेकर निकल पड़ा


ऐसा ही नजारा देखने को मिला भीलवाड़ा जिले के आसींद क्षैत्र के शम्भूग़ढ़ कस्बे में रहने वाले मदन लाल भाम्भी का बेटा दिनेश कुमार भाम्भी ने श्रवण कुमार जैसा कर दिखाया
दिनेश का कहना है कि बचपन मे एक मन्नत मांगी थी जिस दिन 21 वर्ष का हो जाऊंगा उस दिन में अपनी माँ को कंधे पर बैठाकर मेरे इष्ट देवता रामदेवरा कंधे पर बिठा कर करीब 450 किलोमीटर पदेल ले कर जाऊंगा जिसने मुझे जीवन दिया है

दिनेश ने बताया कि श्रवण के माता पिता जन्म से अंधे नही थे । उनके कोई संतान नही थी , इसलिए संतान प्राप्ति के लिए ,उन्होंने अपनी आंखें निकालकर यज्ञ में आहुति दे दी और कहा कि आंखे ना हो तो चलेगा बुढ़ापे में मेरा पुत्र मेरी सेवा करेगा सन्तान नही हो उसकी पीड़ा अजमाल जी को पता है ।हमारे माता पिता को पता है कि हमारे जन्म से पहले कितनी दर दर की ठोकरे खाई मंदिरों में जाकर मिन्नते मांगी होगी तो अपने माता पिता के लिए इतना तो कर ही सकते है

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