April 25, 2019
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एक साथ 29 सैटेलाइट लाॅन्च।

By on April 2, 2019 0 36 Views

 

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने सोमवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से 29 नैनो सैटेलाइट्स लाॅन्च किए। इनमें भारत का एमिसैट, 24 अमेरिका के, 2 लिथुआनिया के और 1-1 उपग्रह स्पेन और स्विट्जरलैंड के है। पहली बार इसरो का मिशन एकसाथ तीन कक्षाओं के लिए भेजा गया। यह लाॅन्चिंग सुबह 9.27 बजे पीएसएलवी-सी 45 राॅकेट की मदद से की गई। एमिसैट सैटेलाइट सीमा पर नजर रखने में मददगार होगा।

लाॅन्च किए गए भारतीय उपग्रह एमिसैट का इस्तेमाल इलेक्ट्रोमैग्निेटिक स्पैक्ट्रम का मापने के लिए किया जाएगा। इसके जरिए दुशमन देशों के रडार सिस्टम पर नजर रखने के साथ ही उनकी लोकेशन का भी पता लगाया जा सकेगा। भेजे जा रहे उपग्रहों में एमिसैट का वनज 436 किलोग्राम और बाकी 28 उपग्रहों का कुल वनज 220 किलोग्राम है।

पहले 17 मिनट पूरे होने पर पीएसएलवी ने 749 किलोमीटर की ऊंचाई पर एमिसैट को स्थापित किया। इसके बाद चैथे चरण में लगे सोलर पावन इंजर को चलाकर करीब 504 किलोमीटर की ऊंचाई पर लाया गया।

चैथे चरण में ही राॅकेअ को 485 किलोमीटर ऊंचाई पर लाकर तीन प्रयोगिक पेलोड की मदद से चंद्रयान-2 अभियान से जुड़े खास प्रयोग किए जाने है। एमिसैट को इसरो और डीआरडीओ ने मिलकर बनाया है। यह उपग्रह देश की सुरक्षा के लिहाज से बेहद खास है। इसका अहम मकसद सीमा पर इलेक्ट्राॅनिक या किसी तरह की मानवीय गतिविधि पर नजर रखना है।

इस बार पीएसएलवी-सी45 से 29 सैटेलाइट लाॅन्च किए जाएंगे। पीएसएलवी की यह 47वीं उड़ान होगी। यह बेहद भरोसेमंद लाॅन्च व्हीकल माना जाता है। जून 2017 अपनी 39वीं उड़ान के साथ पीएसएलवी दुनिया का सबसे भरोसेमंद सैटेलाइट लाॅन्च व्हीकल बना। 104 सैटेलाइ्टस लाॅन्च करने के लिए वैज्ञानिकों ने पीएसएलवी के पावरफुल एक्सएल वर्जन का इस्तेमाल किया था। 2008 से मिशन चंद्रयान हो पाए थे।

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