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युरिया की किल्लत

By on December 28, 2018 0 70 Views

यह निराशाजनक है कि पहले की उपेक्षा इस वर्श बुवाई कम क्षेत्रफल में हुई है, बावजूद इसके सरकार यूरिया की आपूर्ति नहीं कर पा रही है। प्रदेश के 33 में से 9 जिलों में सूखे का प्रकोप है। सूख के अलावा कई जिले ऐसे भी हैं, जहां फसल कमजोर है। प्रदेश मे एक मात्र हाड़ौती क्षेत्र हैं, जहां बरसात अच्छी हुई है। उसी के अनुरूप अच्छी बुवाई हुई है। फसल में यूरिया देने का समय अब अंतिम दौर में है। यदि पंद्रह दिनों तंक किल्लत रही तो किसान खेतों में भरपूर खाद नहीं दे पाएंगे।

प्रदेश में बुवाई के तीन माह के दौरान 7.64 लाख मीट्रिक टन यूरिया की जरूरत होती है। इसके मुकाबले भंडारण की व्यवस्था 1 लाख मीट्रिक टन भी नहीं होती। पूरा स्टाॅक फैक्ट्रियों से गांवों तक पहुंचता है। प्रदेष में इस बार यूरिया की किल्लत नवंबर माह में ही षुरू हो गई। चुनावी माहौल में किसी ने किसानों की समस्या पर ध्यान नहीं दिया। इसका असर यह हुआ कि दिसंबर अतिरिक्त कोटा मंागने लगी है। इन बीस दिन में यूरिया की अतिरिक्त खेप पहुंचनी शुरू हुई है। कृशि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यूरिया की मांग इस बार प्रदेश में समान नहीं है। वैसे हाल में 2500 मीट्रिक टन यूरिया की रैक कोटा पहुंची, जिससे हाड़ौती के चारों जिलो में भेज दिया गया हैं।

वैसे यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत हाड़ौती क्षेत्र में ही सामने है। इसके अलावा हनुमानगढ़ गंगानगर व अन्य क्षेत्र में भी यूरिया की जरूरत है। इसी क्षेत्र में किसानों को सबसे अधिक परेशानी हुई है। यहां खाद वितरण केंद्र पर लगी लाइनों अभी भी खत्म नही हुई है। परेषान किसान अब धरने प्रदर्शन के लिए मजबूर है। जहां तक मारवाड़ क्षेत्र का सवाल है तो मारवाड़ क्षेत्र में यूरिया की ज्यादा मांग नहीं है। नौ जिलों में सूखा पड़ने से यूरिया की मांग पहले की अपेक्षा बहुत कम है।

करीब 58 तहसीलों में सूखें का प्रकोप है। यहां किसानों की 33 प्रतिशत या इससे अधिक खराब हो गई है। बाड़मेर जिले की 14 तहसीलों के 2741 गांवों में सूखा घोशित किया गया है। सुखा प्रभावित क्षेत्रों में बाड़मेर बीकानेर, जैसलमेर जालौर जोधपुर, हनुमानगढ, पाली चुरू व नागौर जिला है। इन जिलों के 1100 हजार गांवों में सूखे के कारण फसल चैपट हुई। ऐसी स्थिति में अब प्रदेष में मांग के अनुसार यूरिया उपलब्ध किसानों को नही कराया जाता है तो फसल का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

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