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वसुंधरा होंगी नेता प्रतिपक्ष, सैनी बने रह सकते है अध्यक्ष!

By on January 3, 2019 0 66 Views

भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में सत्ता गंवाने के बाद अब फिर से सत्रिय नजर आ रही है। पार्टी द्वारा हार के कारणों की जांच भीतर खाने तो की जा चुकी है। वहीं अब आने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी का नुकसान ना को इसे ध्यान में रख कर पार्टी की मजबूती एवं गुटबाजी से बचने के लिए सभी स्तर पर राजनीति जोरों से चल रही है एक और जहां प्रतिपक्ष का नेता बनने के लिए प्रदेष की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती बसुंधरा राजे का नाम तय माना जा रहा है। वहीं कुछ पार्टी नेता वरिश्ट भाजपा नेता व पूर्व गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया का नाम भी इसके लिए ले रहे है।

एक वरिश्ट पदाधिकारी ने नाम न दिए जाने की षर्त पर कहा कि कभी ( गजेंद्र सिंह ) शेखावत का नाम उछाला गया तो कभी ( अर्जुनराम ) मेघवाल को आगे किया गया। फिर रात्यवर्धन राठौड़ को संभावित विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश हुई लेकिन पार्टी पर राजे की पकड़ कमजोर नही पड़ी है। वे अभी भी विधयकों की पहली पसन्द है। वही राजेंद्र राठौड़ श्रीमती राजे के सहयोगी के रूप में प्रतिपक्ष के उप नेता बनाए जा सकते है। इसी के साथ प्रदेश में जो भारतीय जनता पार्टी की हार हुई असको लेकर के सभी स्तरों पर जानकारी जुटाई जा चुकी है।

अधर माना जा रहा है कि प्रदेश की राजनीति में सशक्त एवं पार्टी के सर्वमान्य नेता के रूप में प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल सैनी ही भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पद पर अपना काम देखेंगे। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सैनी बहुत ही संजीदा एवं सरल स्वभाव के व्यक्ति है साथ ही किसी भी गुटबाजी को वह स्वीकार नहीं करते है। ना ही वे किसी गुटबाजी को हवा देते हैं, उनका जो कार्यकाल रहा है उसमें भारतीय जनता पार्टी को सभी विवादों से दूर रखते हुए वे गुटबाजी से ऊपर उठकर अपने काम को अजाम देते आया है ऐसे में उनके ऊपर राश्ट्रीय नेतृत्व का पूरा भरोसा भी जताया जा रहा है।

राजनीति के जानकार भी यही मान रहे है कि वसुंधरा राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका में रहेंगी। बीजेपी का विधायक दल में संख्या बल निसंदेह रूप से उनके पक्ष में है। मुख्यमंत्री के तौर पर बसुंधरा राजे की पाटी के मौजूद केंद्रीय नेतृत्व से खींचतान सार्वजनिक रही है। चाहे वह पार्टी के नए प्रदेशाध्यक्ष का मसला हो या टिकटों के बंटवारे का, वसुंधरा कहीं न कहीं केंद्रीय नेतृत्व पर हावी रही। ऐसे में नही लगता कि लोकसभा चुनावों से पहले बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व किसी तरह के उलटफेर की हिम्मत करेगा।

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